उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने शासन और प्रशासन के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। नेशनल हाईवे पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक महिला एआरटीओ (ARTO) और एक डंपर ड्राइवर के बीच तीखी बहस देखते ही देखते हाथापाई तक पहुँच गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रूटीन चेकिंग के दौरान अधिकारी और ड्राइवर के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। लेकिन मामला तब बिगड़ गया जब लेडी अफसर ने गुस्से में आकर ड्राइवर को थप्पड़ जड़ दिया। इस एक थप्पड़ ने हाईवे पर वह मंजर पैदा कर दिया जिसकी कल्पना शायद महिला अधिकारी ने भी नहीं की थी। ड्राइवर ने दबने के बजाय सीना तानकर अपनी उस ताकत का हवाला दिया, जो आज के दौर में बड़े-बड़े दिग्गजों को हिला देती है—सोशल मीडिया की ताकत।
5 लाख फॉलोअर्स की धमकी
जैसे ही महिला ARTO अधिकारी का हाथ ड्राइवर पर चला, ड्राइवर का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने मौके पर ही चीखते हुए कहा, “मैडम, मेरे 5 लाख फॉलोअर्स हैं, अब आप मुझसे माफी माँगेंगी।” ड्राइवर ने तुरंत अपना फोन निकाला और मौके का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। उसने कैमरे के सामने रोते और चिल्लाते हुए पूरी घटना को लाइव रिकॉर्ड करना शुरू किया। देखते ही देखते वहाँ भीड़ जमा हो गई। ड्राइवर का दावा था कि वह सिर्फ एक मजदूर नहीं है, बल्कि डिजिटल दुनिया का एक प्रभावशाली चेहरा है और कानून सबके लिए बराबर है। सोशल मीडिया पर ‘इंफ्लुएंसर’ होने का यह रूतबा देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अन्य अधिकारी भी एक पल के लिए ठिठक गए। अब यह वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है, जिससे विभाग की छवि पर सवालिया निशान लग गए हैं।
कानून की मर्यादा या पद का अहंकार?
इस घटना ने एक पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है—क्या वर्दी पहन लेने से किसी को भी आम नागरिक पर हाथ उठाने का अधिकार मिल जाता है? वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ड्राइवर बेहद आक्रोश में है और महिला अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि अगर ड्राइवर ने नियमों का उल्लंघन किया था, तो उसका चालान काटना या कानूनी कार्रवाई करना सही प्रक्रिया होती, लेकिन सरेराह थप्पड़ मारना प्रशासनिक प्रोटोकॉल के खिलाफ है। दूसरी ओर, प्रशासनिक हल्कों में चर्चा है कि ड्राइवर ने शायद अभद्र भाषा का प्रयोग किया होगा जिससे अधिकारी उत्तेजित हो गईं। हालांकि, वायरल वीडियो ने जनता का झुकाव ड्राइवर की सहानुभूति की ओर मोड़ दिया है, क्योंकि लोग इसे ‘अमीर और ताकतवर बनाम आम आदमी’ की जंग के रूप में देख रहे हैं।
जांच के घेरे में अफसर: क्या गिरेगी कार्रवाई की गाज?
सोशल मीडिया पर वीडियो ट्रेंड होने के बाद अब प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्नाव के इस नेशनल हाईवे पर हुई बदसलूकी की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो महिला एआरटीओ से स्पष्टीकरण माँगा गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने कानून को हाथ में लिया। वहीं, ड्राइवर का कहना है कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री के ‘जनसुनवाई’ पोर्टल तक ले जाएगा। यह मामला केवल एक थप्पड़ का नहीं रह गया है, बल्कि यह एक उदाहरण बन गया है कि कैसे आज के दौर में कैमरा और फॉलोअर्स किसी भी अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विभाग अपनी अधिकारी का बचाव करता है या ‘डिजिटल पावर’ के दबाव में कोई बड़ी कार्रवाई होती है।
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