बस्ती जनपद में रविवार को आयोजित सनातन संवाद कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। कार्यक्रम का नेतृत्व जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया, जिन्होंने मंच से योगी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए सनातनियों को आगामी चुनाव में एकजुट होकर वोट देने की अपील की। कार्यक्रम में पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी भी मौजूद रहे और उन्होंने मंच से खुले आम कहा कि ब्राह्मण अब एकजुट होकर अहंकारी और सनातन विरोधी सरकार के खिलाफ कार्रवाई करें।
कार्यक्रम का उद्देश्य ब्राह्मण समाज को एकजुट करना था, लेकिन मंच से दिए गए बयान ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया। बस्ती के जीआईसी मैदान में बड़ी संख्या में लोग जुटे और मंच से किए गए आरोपों और अपीलों ने पूरे क्षेत्र में सियासी चर्चा को बढ़ा दिया।
अलंकार अग्निहोत्री ने किया संदेश का प्रचार
कार्यक्रम में अलंकार अग्निहोत्री ने भी उपस्थित जनता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण अब सुदामा नहीं, बल्कि परशुराम की तरह सक्रिय हो। उन्होंने हर घर में फरसा पहुंचाने और “घर-घर फरसा” नारे के माध्यम से जनता में जागरूकता और जोश पैदा किया। उनका कहना था कि अगर जरूरत पड़ी तो ब्राह्मण अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
अलंकार अग्निहोत्री का संदेश राजनीतिक बयानबाजी के साथ धार्मिक आस्था को जोड़ने वाला था। उनके इस आह्वान ने मंच पर उपस्थित ब्राह्मणों में उत्साह भर दिया और आने वाले चुनावी संभावनाओं को लेकर सस्पेंस पैदा किया।
शंकराचार्य ने लगाए योगी सरकार पर गंभीर आरोप
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गाय और सनातन धर्म की रक्षा करती तो विपक्ष को अवसर नहीं मिलता। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ पशुओं का कत्ल और मांस की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई, जो सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री संत होने के बावजूद दो पदों को एक साथ संभाल रहे हैं, जो मर्यादा के अनुकूल नहीं है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि कोई भी संत पीएम, सीएम या राष्ट्रपति पद नहीं लेना चाहता क्योंकि संत का पद सबसे बड़ा होता है और संत को सरकारी पदों से दूर रहना चाहिए।
चुनावी संदेश और सस्पेंस
अविमुक्तेश्वरानंद ने मंच से यह भी चेतावनी दी कि यदि आगामी 2027 के चुनाव में कोई राजनीतिक दल गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का मुद्दा नहीं उठाता है, तो वे खुद किसी उम्मीदवार को मैदान में उतारेंगे। उनका यह बयान न केवल योगी सरकार के खिलाफ एक चुनौती था बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों में ब्राह्मण समाज की भूमिका पर भी सवाल उठाता है।
कार्यक्रम में आए हजारों लोग और मंच पर दिए गए संदेश ने पूर्वांचल की राजनीतिक और धार्मिक राजनीति में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है। अब सवाल यह है कि ब्राह्मण समाज की एकजुटता और शंकराचार्य के आह्वान का चुनावी प्रभाव कितना होगा।
