Chandrashekhar Azad: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से जुड़े प्रस्तावित विधेयक 2026 को लेकर संसद में हलचल तेज हो गई है। इस बीच उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद (Chandrashekhar Azad) ने बड़ा बयान देकर मुद्दे को और गरमा दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यह बिल सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर न रह जाए, बल्कि इसमें केंद्रीय बलों के अधिकारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जरूरी संशोधन भी शामिल किए जाएं। चंद्रशेखर आज़ाद (Chandrashekhar Azad) ने खास तौर पर समय पर पदोन्नति (Promotion) का मुद्दा उठाया और कहा कि यह केंद्रीय बलों के मनोबल से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि उन्होंने संसद में इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिल पाया। अब जब बिल पेश होने जा रहा है, तो वे इसमें संशोधन जोड़ने की मांग करेंगे।
केंद्रीय बलों के योगदान पर जोर
सांसद Chandrashekhar Azad ने अपने बयान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में इन बलों की भूमिका बेहद अहम है। चाहे सीमा सुरक्षा हो, आंतरिक सुरक्षा हो या आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ाई—हर मोर्चे पर ये जवान सबसे आगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि CISF, CRPF, BSF, SSB और ITBP जैसे बल देश के कठिनतम क्षेत्रों में तैनात रहते हैं और अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं। असम, मणिपुर, छत्तीसगढ़ जैसे संवेदनशील इलाकों में इनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके बावजूद, अगर उनके साथ सेवा शर्तों में भेदभाव होता है, तो यह चिंता का विषय है।
पदोन्नति में देरी पर उठाए सवाल
चंद्रशेखर आज़ाद (Chandrashekhar Azad) ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों में खासकर ग्रुप-ए अधिकारियों के साथ पदोन्नति को लेकर भेदभाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि हजारों अधिकारी लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि जब देश की सुरक्षा में लगे जवानों और अधिकारियों का मनोबल कमजोर होगा, तो इसका असर पूरे सुरक्षा तंत्र पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि CAPF बिल में ऐसा प्रावधान जोड़ा जाए, जिससे सभी अधिकारियों को समय पर पदोन्नति मिल सके, ठीक वैसे ही जैसे अन्य सरकारी सेवाओं में होता है।
CAPF बिल का उद्देश्य और आगे की राह
CAPF बिल 2026 का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। अभी तक CISF, CRPF, BSF, SSB और ITBP अलग-अलग कानूनों के तहत संचालित होते हैं, जिससे कई बार प्रशासनिक समस्याएं और विवाद सामने आते हैं। सरकार का मानना है कि एक समान कानून लागू होने से भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों में पारदर्शिता आएगी। हालांकि, विपक्ष और कुछ सांसदों का कहना है कि इस बिल में कुछ जरूरी सुधार किए जाने चाहिए, ताकि बलों के कर्मचारियों को वास्तविक लाभ मिल सके। आने वाले दिनों में संसद में इस बिल पर चर्चा और बहस के दौरान कई अहम मुद्दे सामने आ सकते हैं।
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