मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित ऊर्जा संकट के बीच देश में एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच मथुरा के प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का एक वीडियो सामने आया है, जिसने नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में ठाकुर गैस सिलेंडर की कमी और उसके प्रभावों पर बात करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो लोग फिर से पुराने समय की ओर लौट सकते हैं, जहां चूल्हे पर खाना बनाना आम बात थी। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते ईंधन आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
‘चूल्हे की रोटी बेहतर’—परंपरा बनाम आधुनिकता की बहस
अपने बयान में देवकीनंदन ठाकुर ने पारंपरिक चूल्हे पर बनी रोटी के फायदे गिनाते हुए कहा कि पहले का जीवन ज्यादा संतुलित और प्राकृतिक था। उन्होंने कहा कि चूल्हे पर बनने वाला भोजन स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता था, भले ही उसमें धुएं की समस्या होती थी। इसके उलट उन्होंने गैस पर बनने वाले खाने को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि इससे कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, आधुनिक जीवनशैली ने लोगों की शारीरिक क्षमता को भी प्रभावित किया है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खाना बनाने के माध्यम से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, बल्कि खानपान की गुणवत्ता और जीवनशैली ज्यादा अहम भूमिका निभाती है।
‘पुरुषों में दम नहीं रहा’—विवादित टिप्पणी पर बढ़ी चर्चा
वीडियो में ठाकुर का एक बयान खास तौर पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा कि “आज के पुरुषों में पहले जैसा दम नहीं रहा।” उन्होंने इसे गैस पर बने खाने से जोड़ते हुए एक तुलना भी की, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस टिप्पणी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पारंपरिक जीवनशैली की वकालत मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे अतिशयोक्ति और वैज्ञानिक आधार से परे बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दावों को तथ्यों के आधार पर परखना जरूरी है, क्योंकि स्वास्थ्य से जुड़ी बातों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण बेहद अहम होता है।
ईरान-इजराइल तनाव और भारत में गैस सप्लाई को लेकर चिंता
दरअसल, यह पूरा मामला ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच सामने आया है, जहां हालात लगातार बदल रहे हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी तरह का तनाव सीधे असर डाल सकता है। हालांकि सरकार की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा है कि देश में गैस का पर्याप्त भंडार है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। बावजूद इसके, बाजार में अनिश्चितता और लोगों की चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में धार्मिक और सामाजिक व्यक्तित्वों के बयान भी जनमानस को प्रभावित करते हैं और कई बार नई बहस को जन्म देते हैं।
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