भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मैथ्यू आरोन वैनडाइक नाम के अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो खुद को भाड़े का सैनिक बताता है। उसके साथ 6 यूक्रेनी नागरिकों को भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी पर आरोप है कि वे भारत के रास्ते म्यांमार जाकर वहां के विद्रोही गुटों को सैन्य प्रशिक्षण दे रहे थे। इस मामले में यूएपीए के तहत केस दर्ज किया गया है। यह गिरफ्तारी देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि मामला अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
‘मिशन’ के पीछे की कहानी
जांच में सामने आया है कि मैथ्यू आरोन वैनडाइक ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नाम की एक निजी सिक्योरिटी फर्म से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह और उसके साथी अलग-अलग समय पर टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आए थे। इसके बाद ये लोग गुवाहाटी और मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार में दाखिल हुए। बताया जा रहा है कि 13 मार्च को उसे कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके सहयोगियों को देश के अलग-अलग हिस्सों से पकड़ा गया।
ड्रोन और गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन लोगों ने म्यांमार में सक्रिय विद्रोही गुटों को आधुनिक युद्ध तकनीक सिखाई। इसमें हाई-टेक ड्रोन का इस्तेमाल, निगरानी और हमले की रणनीति के साथ-साथ गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग भी शामिल है। माना जा रहा है कि ये ट्रेनिंग वहां चल रहे सैन्य संघर्ष को और जटिल बना सकती थी। इस मामले में सामने आए तथ्यों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियार और तकनीक के इस्तेमाल का संकेत मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर उठे सवाल
इस गिरफ्तारी के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि विदेशी नागरिक किस तरह भारत के रास्ते अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। फिलहाल एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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