लोकसभा की कार्यवाही को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में संसद में विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जा रहा है। गोगोई के अनुसार जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की किताब से जुड़े मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे, उस समय उम्मीद थी कि सदन की कार्यवाही पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से चलेगी। लेकिन उनके मुताबिक ऐसा नहीं हुआ और राहुल गांधी को कई बार अपनी बात बीच में रोकनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब भी राहुल गांधी कोई अहम मुद्दा उठाने की कोशिश करते हैं, तो उनसे बार-बार अपनी बात को “वेरिफाई” करने के लिए कहा जाता है, जिससे बहस की गति प्रभावित होती है।
‘राहुल गांधी को बार-बार रोका गया’
गौरव गोगोई ने दावा किया कि राहुल गांधी सदन में अपनी बात रखने के लिए बार-बार अनुमति मांगते रहे, लेकिन उन्हें पूरा समय नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने कहा था कि कई देशों में जब किसी बड़े मामले में नेताओं का नाम सामने आता है, तो वहां इस्तीफे भी होते हैं। लेकिन भारत में एक मंत्री का नाम सामने आने के बावजूद इस पर गंभीर चर्चा नहीं हो पा रही है। गोगोई ने आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी अपनी बात रख रहे थे, तभी स्पीकर ने अचानक किसी दूसरे सदस्य को बोलने के लिए बुला लिया। उनके अनुसार यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है और इससे विपक्ष की आवाज दबने का संदेश जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसे अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
शशि थरूर के माइक बंद होने का भी आरोप
गौरव गोगोई ने एक और घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर सदन में बोल रहे थे, तब उनका माइक बंद कर दिया गया था। गोगोई के अनुसार यह बेहद गंभीर मामला है और इससे यह धारणा बनती है कि विपक्ष को बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के एक पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में हम एक-दूसरे के विरोधी हो सकते हैं, लेकिन दुश्मन नहीं। गोगोई ने कहा कि यही भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना है, लेकिन आज हालात ऐसे दिख रहे हैं कि विपक्ष के नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि स्पीकर लोकतंत्र और स्वतंत्रता के प्रतीक होते हैं।
सरकार का पलटवार और नई बहस
गौरव गोगोई के आरोपों पर सरकार की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संसद के नियमों का पालन सभी सदस्यों को करना होता है, चाहे वह प्रधानमंत्री हों या नेता प्रतिपक्ष। उन्होंने कहा कि सदन में बोलने के लिए अनुमति की प्रक्रिया तय है और उसी के तहत सभी को मौका दिया जाता है। रिजिजू ने यह भी कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और जवाहरलाल नेहरू के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि संसद का सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए। इस पूरे विवाद के बाद संसद की कार्यवाही और संसदीय परंपराओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों आमने-सामने नजर आ रहे हैं।
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