इलाहाबाद हाईकोर्ट के गलियारों में आज दोपहर बाद से ही गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद सरस्वती की किस्मत का फैसला आज न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में होना है। ठीक 3:45 बजे जब कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुरू की, तो पूरे परिसर में सन्नाटा पसर गया। यह मामला न केवल धार्मिक जगत से जुड़ा है, बल्कि इसमें लगे आरोप बेहद गंभीर और संवेदनशील हैं। चूंकि कल से हाईकोर्ट में होली की लंबी छुट्टियां शुरू हो रही हैं, इसलिए आज का दिन निर्णायक माना जा रहा है। अगर आज कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती, तो नौ मार्च तक शंकराचार्य पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती रहेगी। भक्तों और कानून के जानकारों की निगाहें अब कोर्ट रूम नंबर 142 के आदेश पर टिकी हैं।
क्या हैं वो आरोप जिसने संत समाज को हिला दिया?
यह पूरा कानूनी विवाद एक बेहद गंभीर मामले से उपजा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर नाबालिगों के साथ यौन शोषण करने के संगीन आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। गिरफ्तारी के डर से बचने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली और अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की गुहार लगाई है। शासकीय अधिवक्ताओं की पूरी टीम इस मामले में कड़ी बहस के लिए तैयार होकर आई है। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि मामला नाबालिगों की सुरक्षा और पॉक्सो (POCSO) जैसी धाराओं से जुड़ा हो सकता है, इसलिए जांच में सहयोग और गिरफ्तारी जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, बचाव पक्ष इन आरोपों को निराधार और साजिश करार दे रहा है। कोर्ट के सामने यह दलील पेश की जा रही है कि एक प्रतिष्ठित धर्मगुरु की छवि को धूमिल करने के लिए यह सब किया गया है।
होली की छुट्टियां और गिरफ्तारी का डर: वकील की दलीलें
सुनवाई के दौरान शंकराचार्य के अधिवक्ताओं ने समय की नजाकत को भांपते हुए कड़े तर्क रखे हैं। उनका सबसे बड़ा तर्क यह है कि आज 27 फरवरी के बाद अदालत सीधे 9 मार्च को खुलेगी। इस 10 दिनों के अंतराल में पुलिस अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर शंकराचार्य को गिरफ्तार कर सकती है। बचाव पक्ष का कहना है कि अगर आज अंतरिम राहत (Interim Relief) नहीं दी गई, तो यह उनके मुवक्किल के मौलिक अधिकारों का हनन होगा। शाम 4:00 बजे के आसपास जब बहस अपने चरम पर पहुंची, तो कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स की सांसें थमी हुई थीं। शासकीय अधिवक्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए, जबकि बचाव पक्ष किसी भी कीमत पर स्टे या बेल की मांग कर रहा है।
आज के फैसले का क्या होगा असर? पूरे देश की नजरें
हाईकोर्ट का आज का आदेश यह तय करेगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की होली अपनों के बीच बीतेगी या सलाखों के पीछे। यदि अदालत उन्हें अग्रिम जमानत दे देती है, तो यह उनके और उनके अनुयायियों के लिए बड़ी जीत होगी। लेकिन, यदि अर्जी खारिज हो जाती है या सुनवाई टल जाती है, तो यूपी पुलिस के पास उन्हें हिरासत में लेने का पूरा अधिकार होगा। इस मामले का असर केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक भी है, क्योंकि शंकराचार्य का पद हिंदू धर्म में सर्वोच्च माना जाता है। संत समाज के बीच इस सुनवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। अब देखना यह है कि कानून के तराजू पर आस्था और आरोपों में से किसका पलड़ा भारी रहता है। कोर्ट का विस्तृत आदेश शाम तक आने की उम्मीद है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा। भीड़ के चलते चेंबर में होगी सुनवाई। दोनों पक्षों को चेंबर में बुलाया गया।
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