भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी खिलाड़ी Shikhar Dhawan को उनके संपत्ति विवाद मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में उनकी पूर्व पत्नी को लगभग 5.72 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया की फैमिली कोर्ट द्वारा दिया गया ‘प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ आदेश भारतीय कानूनों के अनुरूप नहीं है और इसे भारत में लागू नहीं किया जा सकता। इस फैसले ने न सिर्फ धवन को वित्तीय राहत दी है, बल्कि विदेशी अदालतों के आदेशों की भारत में वैधता को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
विदेशी कोर्ट का आदेश क्यों हुआ अमान्य?
फैमिली कोर्ट के जज देवेंद्र कुमार गर्ग ने अपने फैसले में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के Family Law Act 1975 के तहत ‘प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ का जो प्रावधान है, वह भारतीय कानूनों, खासकर Hindu Marriage Act के सिद्धांतों से मेल नहीं खाता। ऑस्ट्रेलियाई कानून में पति-पत्नी की सभी संपत्तियों को एक ‘मैरिटल पूल’ में शामिल कर अदालत को 60 प्रतिशत तक हिस्सा देने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था भारत के पब्लिक पॉलिसी और संपत्ति कानूनों जैसे रजिस्ट्रेशन एक्ट और ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के विरुद्ध है। इसलिए विदेशी अदालत का आदेश भारत में स्वतः लागू नहीं हो सकता।
Shikhar Dhawan की दलीलें और कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान धवन ने अदालत को बताया कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट की कार्यवाही में अपनी इच्छा से हिस्सा नहीं लिया था। उनके अनुसार, उन्हें धमकी दी गई थी कि अगर वे पेश नहीं हुए तो उनकी छवि और करियर को नुकसान पहुंचाया जाएगा। अदालत ने माना कि ऐसी स्थिति में उनकी उपस्थिति को स्वैच्छिक नहीं कहा जा सकता। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि धवन ने ‘इंटरिम प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ के तहत संपत्ति बेचकर जो रकम दी थी, वह भारतीय कानून के तहत बाध्यकारी नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि पूर्व पत्नी ने 82 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की राशि जबरन अपने पास रखी थी, जिसे लौटाने का आदेश दिया गया है।
क्या है अदालत का अंतिम आदेश?
फैमिली कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऑस्ट्रेलिया में स्थित दो संपत्तियों की बिक्री से मिली कुल 8 लाख 12 हजार से अधिक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की राशि पूर्व पत्नी को वापस करनी होगी। इसके साथ ही मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर भुगतान की अंतिम तारीख तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। अदालत ने यह भी घोषित किया कि वित्तीय समझौते से जुड़े सभी दस्तावेज, जो कथित दबाव में साइन किए गए थे, अमान्य हैं। इस फैसले के बाद धवन किसी भी तरह से ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट के उस आदेश से बंधे नहीं रहेंगे।
