ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए दो नए वीडियो इस घटना को सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी के तौर पर दिखा रहे हैं। इन वीडियो को रिकॉर्ड करने वाला शख्स मौके पर मौजूद अव्यवस्था, खतरे और रेस्क्यू की कमी को कैमरे में कैद करता सुनाई देता है। वीडियो में पानी से भरे गड्ढे, चारों तरफ फैले पत्थर, दलदली जमीन और खिसकती दीवारों का जिक्र साफ तौर पर किया गया है। बताया जा रहा है कि ये वही वक्त था, जब युवराज मेहता बोलना बंद कर चुके थे और उनकी हालत बेहद नाजुक थी। इन दृश्यों ने लोगों को झकझोर दिया है, क्योंकि यह सवाल अब और गहरा हो गया है कि अगर सही समय पर और सही तरीके से रेस्क्यू होता, तो क्या एक जान बचाई जा सकती थी।
“20 फीट दलदल है…”—मौके की हालत और खतरे की चेतावनी
वीडियो में रिकॉर्ड करने वाला शख्स बार-बार चेतावनी देता सुनाई देता है कि पानी करीब 20 फीट तक दलदली है, रास्ता ऊबड़-खाबड़ है और तैरना भी संभव नहीं है। वह यह भी कहता है कि जिस दीवार पर लोग खड़े हैं, वह खिसक रही है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद वीडियो में एक व्यक्ति बिना किसी सेफ्टी रस्सी, जैकेट या अन्य सुरक्षा उपकरण के सीधे पानी में उतरता दिखता है। कैमरे के पीछे से आवाज आती है—“अरे रस्सी भी बांध दो इनको…”—जो मौके पर मौजूद लोगों की चिंता और लापरवाही दोनों को दिखाती है। यह दृश्य बताता है कि रेस्क्यू के दौरान न सिर्फ पीड़ित, बल्कि बचाव में उतरे लोगों की जान भी जोखिम में डाली गई। सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं कि जब हालात इतने खतरनाक थे, तो मानक सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
11:45 की सूचना, 12 बजे मौजूदगी—रेस्क्यू टाइमलाइन पर सवाल
इन वीडियो में सबसे अहम मुद्दा रेस्क्यू ऑपरेशन की टाइमिंग को लेकर सामने आता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति दावा करता है कि 11:45 बजे गाड़ी के पानी में गिरने की सूचना मिल चुकी थी और वह खुद 12 बजे से घटनास्थल पर मौजूद था। फुटेज में फायर विभाग, पुलिस, एंबुलेंस और अन्य संसाधन भी नजर आते हैं, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि इतने संसाधनों के बावजूद बचाव कार्य क्यों बिखरा हुआ दिखा। कहीं स्पष्ट कमांड नहीं, कहीं सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं और कहीं उपकरणों की कमी नजर आती है। यही वजह है कि अब लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या शुरुआती गोल्डन आवर में सही प्लानिंग और समन्वय होता, तो नतीजा कुछ और हो सकता था। वीडियो ने रेस्क्यू सिस्टम की तैयारियों और ट्रेनिंग पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर सवाल, सिस्टम की जवाबदेही की मांग
युवराज मेहता की मौत से जुड़े ये वीडियो अब महज फुटेज नहीं रहे, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही तय करने की मांग का आधार बन गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले इलाके में ऐसे खतरनाक खुले जलभराव क्यों हैं और आपात स्थिति में रेस्क्यू टीमें पूरी तैयारी के साथ क्यों नहीं पहुंच पातीं। कई यूजर्स का कहना है कि यह घटना भविष्य के लिए चेतावनी है, ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। वीडियो के आधार पर रेस्क्यू प्रक्रिया की गंभीरता, ट्रेनिंग और संसाधनों की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या युवराज मेहता की मौत से कोई ठोस सबक लिया जाएगा, या यह भी बाकी घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।
