माघ मेला 2026 में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयागराज के संगम नोज पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि प्रशासन की तैयारियां भी कम पड़ती नजर आईं। तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाने के लिए पहुंचने लगे। चारों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, वाहनों की लंबी कतारें और सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच व्यवस्था संभालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। इसी दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने जुलूस और रथ के साथ संगम स्नान के लिए आगे बढ़ रहे थे। लेकिन संगम नोज पर अत्यधिक भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनके रथ को वहीं रोक दिया। अधिकारियों ने आग्रह किया कि वे रथ से उतरकर पैदल आगे बढ़ें, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। यह निर्णय प्रशासन के स्तर पर भीड़ प्रबंधन के तहत लिया गया, लेकिन यहीं से स्थिति तनावपूर्ण होने लगी और माघ मेला 2026 की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
रथ से उतरने के आग्रह पर बढ़ा विवाद
प्रशासन के आग्रह के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों और शिष्यों में नाराजगी फैल गई। समर्थकों का कहना था कि संत के सम्मान और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। देखते ही देखते रथ के आसपास भीड़ बढ़ गई और समर्थक आगे बढ़ने पर अड़ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। माघ मेला 2026 के दौरान यह नजारा देखकर आसपास मौजूद श्रद्धालु भी सकते में आ गए। कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हल्की झड़प की खबरें सामने आईं। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। फिलहाल शंकराचार्य का जुलूस उसी स्थान पर रोक दिया गया, ताकि हालात और न बिगड़ें। प्रशासन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा है और भीड़ अधिक होने के कारण यह कदम उठाया गया, जबकि समर्थकों का आरोप है कि संत के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
“संतों को मारा जा रहा है” – शंकराचार्य के गंभीर आरोप
घटना के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रशासन और पुलिस पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े अधिकारी संतों को मार रहे हैं और पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट रूप से कहा था कि वे सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके संतों के साथ मारपीट की गई। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि जब प्रशासन ने रुकने को कहा तो वे लौटने लगे थे, लेकिन लौटते समय भी उनके साथ हिंसा की गई। माघ मेला 2026 में इस बयान के बाद माहौल और गरमा गया। उन्होंने कहा कि अब उन्होंने तय कर लिया है कि वे कहीं नहीं जाएंगे और संगम स्नान करेंगे, चाहे उन्हें रोका जाए या नहीं। उनके इस बयान ने प्रशासन और संत समाज के बीच टकराव को और गहरा कर दिया। शंकराचार्य के समर्थकों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश देखा गया और उन्होंने इसे संतों के सम्मान से जोड़कर देखा।
प्रशासन पर राजनीतिक दबाव के आरोप
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पूरे मामले को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए कहा कि यह सब ऊपर से मिले आदेशों पर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर या उन्हें खुश करने के लिए की जा रही हो सकती है। उनका कहना था कि कुम्भ मेले के दौरान उन्होंने कुछ जिम्मेदार लोगों पर सवाल उठाए थे, जिसका बदला अब माघ मेला 2026 में लिया जा रहा है। इन आरोपों के बाद प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया और भीड़ नियंत्रण के लिए समान नियम सभी पर लागू किए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने माघ मेला 2026 की व्यवस्थाओं, संतों और प्रशासन के बीच तालमेल और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और संत समाज के बीच यह तनाव कैसे सुलझता है और आगे के प्रमुख स्नान पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो पाते हैं या नहीं।
