जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में आ गई हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर फिलिस्तीन के समर्थन में उसका झंडा साझा करते हुए नारा लिखा— “From the River to the Sea, Palestine Will Be Free”। यह पोस्ट ऐसे समय में सामने आई है जब जम्मू-कश्मीर पुलिस पहले से ही एक स्थानीय क्रिकेटर से जुड़े इसी तरह के मामले की जांच कर रही है। महबूबा मुफ्ती की इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। समर्थक इसे मानवाधिकार और वैश्विक मुद्दा बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे संवेदनशील माहौल में भड़काऊ करार दे रहे हैं।
क्या है ‘फ्रॉम द रिवर टू द सी’ नारे का असली मतलब?
महबूबा मुफ्ती द्वारा इस्तेमाल किया गया यह नारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद विवादित माना जाता है। इस नारे का अर्थ जॉर्डन नदी से लेकर भूमध्य सागर तक एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना से जोड़ा जाता है। इजरायल समर्थक इसे इजरायल के अस्तित्व को नकारने वाला नारा मानते हैं, जबकि फिलिस्तीन समर्थकों का कहना है कि यह आज़ादी और आत्मनिर्णय की मांग का प्रतीक है। इसी विरोधाभास के कारण यह नारा कई देशों में राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन चुका है। भारत में भी इस तरह के नारे और प्रतीकों को लेकर समय-समय पर कार्रवाई होती रही है, खासकर तब जब मामला सार्वजनिक या खेल आयोजनों से जुड़ा हो।
हेलमेट पर झंडा दिखा और पहुंचा समन
पूरा विवाद तब और गहरा गया जब जम्मू-कश्मीर चैंपियंस लीग के एक मैच के दौरान एक कश्मीरी क्रिकेटर के हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा नजर आया। यह घटना 31 दिसंबर 2025 को जेके11 किंग्स और जम्मू ट्रेलब्लेजर्स के बीच खेले गए मुकाबले में कैमरे में कैद हो गई। इसके बाद पुलिस ने क्रिकेटर को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया। पुलिस के अनुसार, खिलाड़ी की पहचान फुरकान भट के रूप में हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि झंडा दिखाने के पीछे क्या मंशा थी और क्या इसके लिए किसी तरह की अनुमति ली गई थी या नहीं। खेल आयोजकों से भी इस संबंध में पूछताछ की जा रही है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब फिलिस्तीनी झंडे या उससे जुड़े प्रतीकों को लेकर पुलिस कार्रवाई हुई हो। पिछले साल जुलाई में उत्तर प्रदेश के देवरिया में मुहर्रम जुलूस के दौरान कथित तौर पर फिलिस्तीनी झंडा वाली टी-शर्ट पहनने के आरोप में चार युवकों को हिरासत में लिया गया था। इसी तरह आगरा में भी एक व्यक्ति को जुलूस के दौरान फिलिस्तीनी झंडा लहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन मामलों को देखते हुए कश्मीर क्रिकेटर प्रकरण को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि यह सिर्फ समर्थन का प्रतीक था या नियमों का उल्लंघन।
Read more-दिल्ली की काली रात: चलती बस में 23 साल की लड़की से हुई थी दरिंदगी, लोहे की रॉड डालकर की गई हैवानियत
