बरेली जिले की राजनीति शुक्रवार दोपहर उस वक्त सन्न रह गई, जब फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई. वह बरेली स्थित सर्किट हाउस में पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ चल रही विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में शामिल थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैठक के दौरान विधायक सामान्य दिख रहे थे, लेकिन दोपहर करीब सवा दो बजे उन्होंने असहज महसूस किया और कुर्सी पर ही लड़खड़ा गए. अचानक हुए इस घटनाक्रम से बैठक स्थल पर अफरा-तफरी मच गई. सहयोगी और पार्टी कार्यकर्ता तुरंत उन्हें संभालने पहुंचे और बिना देर किए अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई.
अस्पताल पहुंचते ही हालत नाजुक, डॉक्टरों की कोशिश नाकाम
डॉ. श्याम बिहारी लाल को तत्काल बरेली के मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम पहले से अलर्ट थी. अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, जब विधायक को इमरजेंसी में लाया गया, तब उनकी नाड़ी और ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहा था. डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया. करीब एक घंटे तक लगातार प्रयास किए गए, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. अंततः दोपहर करीब तीन बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. विधायक के निधन की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई, हर चेहरा गम और सदमे से भरा हुआ था.
मुख्यमंत्री योगी समेत कई नेताओं ने जताया शोक
बीजेपी विधायक की अचानक मौत से पूरे प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक संदेश जारी करते हुए इसे अत्यंत दुःखद बताया. उन्होंने लिखा कि जनपद बरेली के फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का आकस्मिक निधन बेहद पीड़ादायक है. मुख्यमंत्री ने दिवंगत विधायक को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी उनके निधन पर दुख जताया और इसे पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया.
शिक्षक से विधायक तक का सफर, दो बार जनता ने जताया भरोसा
डॉ. श्याम बिहारी लाल का जन्म एक जनवरी 1966 को हुआ था. उन्होंने एम.जे.पी. रोहिलखंड विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी और वह लंबे समय तक विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे. शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा. वर्ष 2017 में वह पहली बार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर फरीदपुर (आरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. इसके बाद जनता ने दोबारा उन पर भरोसा जताया और वह दूसरी बार भी विधानसभा पहुंचे. उनके परिवार में पत्नी मंजू लता, एक बेटा और दो बेटियां हैं. उनके अचानक निधन से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा फरीदपुर क्षेत्र शोक में डूब गया है.
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