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जिस झगड़े ने हिला था पूरा अस्पताल, अब डॉक्टर-मरीज मिले गले फिर एक-दूसरे से माफी मांगी और…

IGMC शिमला में डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट का विवाद खत्म हो गया है। डॉक्टर राघव नरूला और मरीज अर्जुन पंवार ने एक-दूसरे से माफी मांगकर मामला शांत कर दिया।

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राजधानी शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट का मामला बीते दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना रहा। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई इस घटना ने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था, बल्कि डॉक्टरों की सुरक्षा और मरीजों के व्यवहार को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए थे। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मामला तेजी से तूल पकड़ गया और अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि अब इस पूरे विवाद पर विराम लग गया है। विवाद के केंद्र में रहे डॉक्टर राघव नरूला और मरीज अर्जुन पंवार ने आपसी समझदारी दिखाते हुए पुरानी बातों को भुला दिया है। दोनों ने न सिर्फ एक-दूसरे से माफी मांगी, बल्कि गले मिलकर यह संदेश भी दिया कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत से संभव है।

दोनों पक्षों ने मानी गलती, समझौते का रास्ता चुना

समझौते के बाद मीडिया से बातचीत में डॉक्टर राघव नरूला ने साफ कहा कि उस वक्त हालात ऐसे बन गए थे, जिसमें दोनों तरफ से गलतियां हुईं। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद में एकतरफा दोष देना सही नहीं होता। डॉक्टर नरूला के मुताबिक, “हमने बैठकर बात की, एक-दूसरे की बात सुनी और यह महसूस किया कि गुस्से में लिया गया फैसला किसी के लिए भी ठीक नहीं होता। अब हमारे बीच कोई नाराजगी नहीं है।” डॉक्टर का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले रेजिडेंट डॉक्टर्स और प्रशासन के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही थीं। समझौते के बाद अस्पताल के माहौल में भी राहत महसूस की जा रही है और कामकाज धीरे-धीरे सामान्य होता दिख रहा है।

मरीज अर्जुन पंवार ने भी विवाद खत्म होने की पुष्टि की

मरीज अर्जुन पंवार ने भी इस पूरे मामले को यहीं खत्म करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने अपनी ओर से माफी मांग ली है और उन्होंने भी आगे कोई विवाद न बढ़ाने का फैसला किया है। अर्जुन पंवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब वह उस घटना को दोबारा याद कर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उनके मुताबिक, “जब सामने वाला अपनी गलती मान ले और माफी मांग ले, तो बात को आगे खींचने का कोई मतलब नहीं होता।” मरीज का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले मरीज पक्ष की नाराजगी और विरोध की खबरें सामने आ रही थीं। इस आपसी सहमति ने न सिर्फ कानूनी उलझनों की संभावना को कम किया, बल्कि अस्पताल प्रशासन के लिए भी बड़ी राहत की स्थिति पैदा कर दी है।

वायरल वीडियो से बढ़ा तनाव, सुलह ने दिया सकारात्मक संदेश

गौरतलब है कि IGMC शिमला में हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। रेजिडेंट डॉक्टर्स और मरीज के परिजनों के बीच उपजे तनाव के कारण अस्पताल का माहौल काफी गरमा गया था। कई संगठनों ने डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, वहीं मरीजों के साथ व्यवहार पर भी बहस छिड़ गई। ऐसे माहौल में यह समझौता एक सकारात्मक संदेश लेकर आया है। यह घटना बताती है कि भावनाओं में बहकर लिए गए फैसले विवाद को बढ़ा सकते हैं, लेकिन संवाद और आपसी समझ से हालात को संभाला जा सकता है। IGMC शिमला का यह मामला अब एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहां टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देकर शांति का रास्ता चुना गया।

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