शनिवार का दिन था और स्थान था कानपुर जिले की नरवल तहसील। संपूर्ण समाधान दिवस के तहत जिले के सबसे बड़े अधिकारी फरियादियों की समस्याएं सुनने पहुंचे थे। तहसील परिसर में सुबह से ही लोगों की भीड़ लगी थी, हर किसी को उम्मीद थी कि आज उसकी सुनवाई जरूर होगी। लेकिन इसी बीच अचानक माहौल उस वक्त बदल गया जब भीड़ से एक युवक चीखता हुआ बाहर आया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, युवक ने खुद पर पेट्रोल डाल लिया। कुछ ही सेकेंड में पूरे कमरे में पेट्रोल की तेज गंध फैल गई और शांति की जगह अफरा-तफरी मच गई। युवक तेज आवाज में चिल्लाया—“साहब! कोई नहीं सुनता, आज जान दे देंगे।” डीएम के सामने यह दृश्य देखकर वहां मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और फरियादी सभी सन्न रह गए।
पुलिस ने समय रहते बचाई जान
घटना को बिगड़ने से रोकने के लिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिस ने युवक को चारों ओर से घेर लिया और उससे पेट्रोल की बोतल छीन ली। किसी तरह आग लगाने से पहले ही उसे काबू में कर लिया गया। पूछताछ में युवक की पहचान रणजीत उर्फ बउवन सिंह के रूप में हुई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यदि कुछ सेकेंड की भी देरी हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। युवक को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर शांत किया गया और उसकी बात सुनी गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान डीएम और प्रशासनिक अमला भी मौके पर मौजूद रहा। इस घटना ने संपूर्ण समाधान दिवस की व्यवस्था और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए।
“फिल्मों में देखा था, इसलिए ऐसा किया”
जब रणजीत से पूछा गया कि उसने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया, तो उसका जवाब प्रशासन और सिस्टम के लिए किसी तमाचे से कम नहीं था। रणजीत ने कहा कि वह काफी समय से परेशान है और कई बार अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जा चुका है, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। उसने बताया कि उसके पड़ोसी उसे लगातार धमकाते हैं और कहते हैं कि उनका बेटा फौज में है, इसलिए उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। रणजीत का कहना था कि जब सीधे तरीके से कोई नहीं सुनता तो मजबूरी में ऐसा रास्ता अपनाना पड़ता है। उसने कहा—“हमने फिल्मों में देखा था कि ऐसे करने से अधिकारी ध्यान देते हैं, इसलिए पेट्रोल डाल लिया।” उसका यह बयान सिस्टम में आम आदमी की बेबसी को उजागर करता है।
मां का आरोप और प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
रणजीत की मां रानी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने आरोप लगाया कि पड़ोस की महिलाओं ने उनके साथ मारपीट की है और इसी वजह से उनका बेटा मानसिक रूप से टूट गया। रानी ने कहा कि वे लोग काफी समय से डर और दबाव में जी रहे हैं, लेकिन कहीं से उन्हें इंसाफ नहीं मिला। इस घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच और पीड़ित परिवार की शिकायत पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि यह सवाल अब भी कायम है कि जब एक युवक को अपनी बात रखने के लिए डीएम के सामने पेट्रोल डालने जैसा कदम उठाना पड़े, तो आम आदमी की सुनवाई व्यवस्था पर भरोसा कैसे बना रहेगा। नरवल तहसील की यह घटना सिर्फ एक आत्मदाह प्रयास नहीं, बल्कि सिस्टम के प्रति बढ़ती निराशा की गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है।
