अमेरिका में 83 वर्षीय महिला और उसके बेटे की मौत के बाद परिवार ने OpenAI पर चौंकाने वाला आरोप लगाया है। दावा किया गया कि ChatGPT ने बेटे के मन में खतरनाक भ्रम पैदा किए, जिससे हत्या और सुसाइड जैसी दुखद घटना हुई। पढ़ें पूरा मामला आसान शब्दों में।
अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने टेक्नोलॉजी और मानव मनोविज्ञान दोनों को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। सैन फ्रांसिस्को में 83 साल की सुजैन एडम्स और उनके 56 वर्षीय बेटे स्टीन-एरिक सोएलबर्ग की मौत ने परिवार और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया। दोनों की जान एक ही दिन, एक ही घर में गई पहले मां की हत्या और फिर बेटे का सुसाइड।
लेकिन इस पूरी घटना ने तब तूल पकड़ा जब परिवार के अन्य सदस्यों ने दावा किया कि इस हादसे की जड़ में कोई इंसान नहीं, बल्कि एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट ChatGPT था। अब सुजैन के रिश्तेदारों ने ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया है।
शिकायत में AI पर लगाए गए गंभीर आरोप
कैलिफोर्निया सुपीरियर कोर्ट में दाखिल की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ChatGPT ने सोएलबर्ग के साथ बातचीत के दौरान लगातार ऐसी बातें कही, जिसने उसके मन में गलतफहमियां और डर पैदा कर दिया। दावा है कि AI चैटबॉट ने उसे यकीन दिलाया कि वह किसी पर भरोसा नहीं कर सकता, यहां तक कि अपनी मां पर भी नहीं।
शिकायत में यह भी बताया गया कि चैटिंग के दौरान ChatGPT ने कई बार यह संकेत दिया कि उसके आसपास रहने वाले लोग उसके दुश्मन हैं। यहां तक कि डिलीवरी कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, दुकानदार और उसके दोस्त all agents working against him जैसा भ्रम पैदा किया गया। परिवार का कहना है कि AI ने धीरे-धीरे उसके दिमाग में यह कहानी बिठा दी कि पूरी दुनिया उसके खिलाफ है और केवल ChatGPT ही उसका “सच्चा साथी” है।
आरोप: ‘ChatGPT ने बढ़ाई भावनात्मक निर्भरता’
मुकदमे में यह भी दावा किया गया है कि सोएलबर्ग पहले से मानसिक रूप से परेशान था, लेकिन उसे सही दिशा देने की बजाय चैटबॉट ने उसके मन में और अंधेरा भर दिया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि AI ने उसकी भावनात्मक निर्भरता बढ़ाई और ऐसा महसूस कराया कि ChatGPT ही उसकी सुरक्षा और समझ का एकमात्र स्रोत है।
उन्होंने बताया कि चैटबॉट ने यह भी कहा कि सोएलबर्ग की मां उस पर निगरानी रख रही है। ये बातें उसके दिमाग में लगातार डर और शक को जन्म देती रहीं। परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्हाट्सएप या फेसबुक के चैट से आगे बढ़कर अब AI बातचीत भी मानसिक रूप से कमजोर लोगों को गलत दिशा में धकेल सकती है—और यही स्थिति यहां हुई।
हत्या और सुसाइड के पीछे ‘AI इनफ्लुएंस’ की जांच
मामले के अनुसार, 3 अगस्त को सोएलबर्ग ने अपनी बुजुर्ग मां को बुरी तरह पीटा और गला घोंटकर मार डाला। इसके तुरंत बाद वह खुद भी चाकू मारकर सुसाइड कर लेता है। प्रशासनिक जांच में सामने आया कि मृतक के फोन में ChatGPT के साथ कई लंबी चैट मौजूद थी।
परिवार का आरोप है कि इन बातों ने उसके मानसिक संतुलन पर गहरा असर डाला और उसने यकीन कर लिया कि उसकी मां तथा बाकी दुनिया उसके खिलाफ साजिश कर रही है। इसलिए उसने यह दर्दनाक कदम उठाया। दूसरी ओर, OpenAI पर आरोप है कि उसने एक ऐसा उत्पाद तैयार किया जो मानसिक रूप से संवेदनशील लोगों के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है। कंपनी फिलहाल इस मामले सहित ऐसे 8 बड़े मुकदमों का सामना कर रही है, जिनमें दावा किया गया है कि ChatGPT ने लोगों को सुसाइड, भ्रम और खतरनाक विचारों की ओर धकेला।
यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ कैसे किया जाना चाहिए और कंपनियों पर किस तरह के नियम लागू होने चाहिए। कोर्ट में यह देखना दिलचस्प होगा कि ChatGPT के खिलाफ लगे आरोपों को कितना कानूनी आधार मिलता है और क्या AI कंपनियों को भविष्य में अपनी तकनीक को लेकर और सख्त मानकों का पालन करना होगा।
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