बहराइच जिले के हरदी थाना क्षेत्र के महाराजगंज कस्बे में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दिन एक ऐसी वारदात हुई जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था। भीड़भाड़ के बीच अचानक फैली तनावपूर्ण स्थिति में रामगोपाल मिश्रा की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हिंसा ने देखते ही देखते बड़ा रूप ले लिया और इलाके में दहशत फैल गई। घटना सामने आते ही पुलिस ने कार्रवाई तेज की और पूरे क्षेत्र में भारी बल तैनात किया गया।
13 लोग पहुंचे थे जेल, लंबी सुनवाई के बाद सामने आया सच
हत्या के बाद पुलिस ने जांच शुरू करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए केस की सुनवाई तेजी से कराई गई। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और मौके से जुटाए सबूतों ने धीरे-धीरे पूरी तस्वीर साफ की। अदालत ने पाया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने मिलकर रामगोपाल पर घातक हमला किया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत दलीलें पेश कीं, जो आरोपियों के खिलाफ निर्णायक साबित हुईं।
सरफराज को फांसी की सजा
प्रथम अपर जिला जज की अदालत ने बुधवार को इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सरफराज को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि सरफराज की भूमिका सबसे ज्यादा घातक और हिंसक थी, इसलिए उसे फांसी की सजा देना उचित है। वहीं, मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद सहित कुल 9 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
परिवार ने कहा- देर से सही
फैसले के बाद रामगोपाल मिश्रा के परिजनों ने राहत की सांस ली और अदालत का धन्यवाद किया। उनका कहना है कि यह फैसला उन सभी लोगों के लिए संदेश है जो समाज में हिंसा फैलाने की कोशिश करते हैं। गांव और आसपास के क्षेत्रों में भी अदालत के इस निर्णय के बाद माहौल शांत बताया जा रहा है। पुलिस ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि कोई अप्रिय स्थिति न पैदा हो। इस केस ने बहराइच समेत पूरे प्रदेश में न्याय की उम्मीदें जगाने का काम किया है।
