बिहार की राजनीति में एमएलसी चुनाव के बीच एक नया सियासी समीकरण चर्चा में है। जेडीयू विधायक अनंत सिंह पटना स्नातक सीट से जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने उम्मीदवार के पक्ष में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अनंत सिंह आने वाले दिनों में जन सुराज का हिस्सा बन सकते हैं? बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को नवादा पहुंचे प्रशांत किशोर से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने ऐसा जवाब दिया, जिसने चर्चाओं को और हवा दे दी।
प्रशांत किशोर का इशारा- ‘आगे भी और लोग आएंगे’
प्रशांत किशोर ने अनंत सिंह के जन सुराज में शामिल होने की संभावना पर सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि पार्टी विचारधारा के आधार पर चलती है और जो लोग उस विचार के साथ जुड़ना चाहते हैं, उनका स्वागत है। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “अभी तो भगदड़ शुरू हुई है, आगे भी और लोग आएंगे।” पीके के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में बिहार की दूसरी पार्टियों के कुछ नेता भी जन सुराज के साथ आ सकते हैं। हालांकि, अनंत सिंह के पार्टी में शामिल होने को लेकर अभी कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।
नवादा में नीतीश कुमार और जेडीयू पर भी बरसे पीके
पटना स्नातक सीट के प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित सभा के दौरान प्रशांत किशोर ने जेडीयू और नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि चुनावी माहौल में कई जगहों पर नीतीश कुमार की तस्वीर नजर नहीं आ रही है और वह खुद प्रचार में सक्रिय नहीं दिख रहे हैं। पीके ने कहा कि अब निशांत कुमार को आगे करके नए चेहरे को सामने लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बीजेपी और जेडीयू के बीच खींचतान का दावा करते हुए कहा कि दोनों दलों के बीच सबकुछ सहज नहीं है। हालांकि, ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक दावे हैं।
बाढ़ और बेरोजगारी को लेकर सरकार पर साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में बिहार की मौजूदा समस्याओं को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, युवा रोजगार की तलाश में हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। ऐसे समय में ‘विकसित भारत’ अभियान को लेकर होने वाले कार्यक्रमों पर उन्होंने सवाल उठाया। पीके ने तंज करते हुए कहा कि विकास का दावा उन लोगों को दिखाई दे रहा है जो बीजेपी के साथ हैं, जबकि जिन परिवारों की मुश्किलों के कारण घर का चिराग बुझ गया है, उनकी स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। अब अनंत सिंह और जन सुराज के बीच बढ़ती नजदीकी बिहार की राजनीति में कितना बड़ा बदलाव लाती है, इस पर सबकी नजर है।
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