रणवीर सिंह की नई फिल्म धुरंधर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई है। हालांकि इस बार चर्चा का कारण फिल्म की कहानी या रणवीर सिंह की एक्टिंग नहीं, बल्कि उसमें दिखाया गया बलूच समुदाय है। फिल्म में एक डायलॉग है, जिसमें पुलिस अधिकारी चौधरी असलम कहते हैं— “मगरमच्छ पर भरोसा कर सकते हैं, बलूच पर नहीं।” यही संवाद अब विवाद का केंद्र बन गया है।
फिल्म रिलीज होने के बाद यह डायलॉग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, और दुनिया भर में रहने वाले बलूच कार्यकर्ताओं ने इसे बेहद आपत्तिजनक बताया। उनका कहना है कि फिल्म में बलूचों को अपराधी और अविश्वसनीय दिखाना उनके वास्तविक संघर्ष और पहचान को गलत तरीके से चित्रित करता है।
मीर यार बलूच ने कहा— “हम आतंक के शिकार, अपराधी नहीं”
बलूचिस्तान के जाने-माने कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने फिल्म देखने के बाद एक लंबा पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने लिखा कि बलूच समुदाय दशकों से पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों का शिकार रहा है। हजारों बलूचों को अगवा किया गया, कई की हत्या कर दी गई, और लाखों लोग अपने ही घरों में असुरक्षित रहते हैं।
मीर यार के अनुसार, बॉलीवुड को चाहिए कि वह बलूचों की इस असल कहानी को समझे, न कि उन्हें आतंकवाद से जोड़कर दिखाए। उन्होंने कहा— “दुनिया पहले ही हमारी आवाज नहीं सुनती। अगर भारत जैसी बड़ी इंडस्ट्री भी हमें गलत तरीके से दिखाएगी, तो हमारी लड़ाई और मुश्किल हो जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि बलूच लोग भारत के खिलाफ नहीं, बल्कि हमेशा से उसके प्रति सम्मान और विश्वास रखते हैं। ऐसे में फिल्म का यह चित्रण उन्हें भावनात्मक रूप से चोट पहुंचता है।
भारत–बलूचिस्तान रिश्तों का असली पहलू सामने लाने की मांग
मीर यार बलूच ने अपने पोस्ट में स्पष्ट कहा कि फिल्म धुरंधर में दिखाया गया भारत–बलूचिस्तान टकराव वास्तविकता से बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि इतिहास में कई बार बलूच नेताओं ने भारत से सहयोग और समर्थन की उम्मीद जताई है, क्योंकि पाकिस्तान ने उनके प्रदेश पर लगातार हमले और अत्याचार किए हैं।
उन्होंने बताया कि बलूच समुदाय भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखता है जो लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का सम्मान करता है। इसलिए जब बॉलीवुड जैसी बड़ी इंडस्ट्री बलूचों को खलनायक की तरह दिखाती है, तो वह न केवल उनके संघर्ष को कमजोर करती है बल्कि भारत के प्रति उनके विश्वास को भी चोट पहुंचाती है।
मीर यार ने आग्रह किया कि भारतीय फिल्म निर्माताओं को संवेदनशील मुद्दों पर रिसर्च कर कहानी बनानी चाहिए, ताकि गलतफहमियां न फैलें और समुदायों के संघर्ष को सम्मानपूर्वक दिखाया जा सके।
फिल्म मेकर्स की चुप्पी
इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोग बलूच नेता की बात से सहमत नजर आए और उन्होंने फिल्म मेकर्स पर बिना रिसर्च किसी समुदाय को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया। वहीं कुछ दर्शकों का कहना था कि फिल्म एक फिक्शन है और हर चीज को वास्तविकता से जोड़ना ठीक नहीं।
अब तक फिल्म की टीम या रणवीर सिंह की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि फिल्म जगत के कई वरिष्ठ समीक्षक मानते हैं कि जब कोई समुदाय दशकों से संघर्ष झेल रहा हो, तो उसे संवेदनशीलता के साथ दिखाना बेहद जरूरी है।
वहीं बलूच कार्यकर्ताओं ने कहा है कि अगर बॉलीवुड उनके बारे में गलत संदेश फैलाएगा, तो वे वैश्विक मंचों पर अपनी बात रखने के लिए और आवाज उठाएंगे। उनका कहना है कि वे दुनिया को बताना चाहते हैं कि बलूच आतंकवादी नहीं, बल्कि पाकिस्तान के दमन का शिकार लोग हैं, जो अपनी पहचान, संस्कृति और आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे हैं।
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