अगर पिता अपनी खुद की कमाई से खरीदी गई संपत्ति यानी स्व-अर्जित प्रॉपर्टी को अपनी बेटी के नाम करना चाहें, तो इस पर किसी को भी आपत्ति करने का अधिकार नहीं होता। बेटा भी इस फैसले को चुनौती नहीं दे सकता, क्योंकि कानून के मुताबिक, मालिक अपनी संपत्ति किसी को भी देने या बेचने के लिए स्वतंत्र होता है। ऐसे में बेटा अदालत में जाकर दावा करे तो उसकी याचिका टिक नहीं पाएगी।
पैतृक संपत्ति के मामले में क्या है नियम
अगर मामला पैतृक संपत्ति का हो, यानी जो संपत्ति पूर्वजों से मिली हो, तब बेटा या अन्य वारिस अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। क्योंकि पैतृक संपत्ति में सभी कानूनी वारिसों का जन्म से ही हक बनता है। ऐसे में पिता पूरी संपत्ति सिर्फ एक वारिस के नाम नहीं कर सकते। कोर्ट में मामला जाने पर न्यायालय सभी वारिसों को बराबरी का हिस्सा देने का आदेश दे सकता है।
वसीयत और गिफ्ट डीड में क्या अंतर
पिता चाहे तो बेटी के नाम संपत्ति वसीयत (Will) या गिफ्ट डीड से कर सकते हैं। वसीयत के मामले में यह पिता के निधन के बाद लागू होती है, जबकि गिफ्ट डीड रजिस्ट्री के साथ तुरंत प्रभाव में आती है। बेटा केवल तभी अदालत जा सकता है, जब यह साबित हो कि दस्तावेज धोखाधड़ी या दबाव में तैयार किए गए हैं। अन्यथा उसका दावा टिक नहीं पाएगा।
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