संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की पाकिस्तान नीति पर तीखा सवाल दागा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का दावा सही है कि पाकिस्तान घुटनों पर था, तो फिर सीजफायर करने की जरूरत क्यों पड़ी? संसद के भीतर हुड्डा ने कहा, “जब आप खुद कह रहे हैं कि पाकिस्तान कमजोर स्थिति में था, तो आपने संघर्षविराम कर उसे राहत क्यों दी?”
“क्यों किया सीजफायर, जब पाकिस्तान कमजोर था?”
हुड्डा ने सरकार पर सीधा हमला करते हुए यह भी पूछा कि अगर आप वास्तव में पीओके को वापस लाने की बात कर रहे हैं, तो फिर यह कदम उस दिशा में कैसे मददगार होगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आज सरकार कहती है कि पीओके हमारा है, लेकिन अगर आपने संघर्षविराम किया है, तो फिर इस लक्ष्य को कैसे हासिल करेंगे?” उनका इशारा इस ओर था कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क नजर आता है।
“क्या दुनिया भर में घूमने से पाकिस्तान का मुद्दा सुलझेगा?”
सांसद ने यह भी कहा कि सरकार को अब तक दुनिया भर में घूम-घूमकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आपके पास मजबूत कूटनीतिक रणनीति थी, तो आपको प्रतिनिधिमंडल भेजने की क्या ज़रूरत पड़ी? विपक्ष के इन तीखे सवालों से संसद में चर्चा गरमा गई और सत्तापक्ष को सफाई देने पर मजबूर होना पड़ा। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाती है।
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