जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव प्रक्रिया के दौरान “एक बहुत बड़ी गलती” हुई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जिससे कई लोगों को मतदान का अधिकार नहीं मिल पाया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले पर अदालत की सुनवाई चुनाव के बाद होना तय है, लेकिन जब चुनाव ही खत्म हो गए, तो ऐसी सुनवाई का क्या लाभ रहेगा। इस बयान को बीजेपी पर परोक्ष हमला माना जा रहा है।
‘अगर जीतना था तो जीत गए’—सीधा संकेत
उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने अपने बयान में कहा कि अगर किसी पार्टी को चुनाव जीतना था, तो वह जीत गई, लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि चुनाव की प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष रही। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, उनका अधिकार कौन लौटाएगा। उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि हर योग्य मतदाता को मतदान का अवसर मिले। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब देश के बाकी हिस्सों में क्या होता है, इस पर नजर रखनी होगी। उनके इस बयान को विपक्ष की उस चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शोपियां मदरसा विवाद पर जवाब
शोपियां में एक मदरसे को सील किए जाने के मुद्दे पर विपक्षी दल पीडीपी द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि वह किसी दूसरी पार्टी के दबाव में काम नहीं करते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हर उस मुद्दे पर बोलती है, जहां बोलना जरूरी होता है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि न तो वह खामोश हैं और न ही उनकी सरकार। उनके मुताबिक, सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है और हर जरूरी मामले पर उचित प्रतिक्रिया दी जा रही है।
विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलों पर सफाई
नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ विधायकों के पार्टी छोड़ने की खबरों पर भी उमर अब्दुल्ला ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने इन अटकलों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया और कहा कि अगर ऐसा कुछ होता, तो वह खुद इस तरह के सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आते। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए गलत जानकारी फैला रहे हैं। वहीं, कैबिनेट में फेरबदल के सवाल पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि जब जरूरत होगी, तब फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, उनका यह बयान साफ करता है कि राज्य और देश की राजनीति में कई मुद्दों पर तनाव और बहस जारी रहने वाली है।
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