UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में PDA को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में PDA की नई व्याख्या करते हुए ‘P’ का मतलब पंडित बताया था। अब बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इसी मुद्दे को लेकर सपा पर निशाना साधा है। मायावती ने सपा की राजनीति को लेकर कहा कि पार्टी समय और चुनावी जरूरत के हिसाब से अपना रुख बदलती रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सपा PDA में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की बात करती थी, लेकिन अब ब्राह्मण समाज को अपनी तरफ जोड़ने के लिए ‘P’ का मतलब पंडित बताया जा रहा है। मायावती ने इसे सपा की राजनीतिक रणनीति बताया है।
‘बसपा की सोच सभी समाज के लिए’
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी की राजनीति किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करती है। उनका कहना है कि पार्टी की सोच समाज के सभी वर्गों के हित से जुड़ी हुई है। मायावती ने अपनी सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार बार सरकार बनी और उस दौरान भी इसी सोच के आधार पर सरकार चलाई गई। उन्होंने दावा किया कि बसपा की राजनीति में समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की कोशिश की जाती है। मायावती ने सपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी राजनीति जाति के आधार पर वोट हासिल करने के आसपास घूमती रही है।
‘सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है’
बसपा प्रमुख ने सपा पर हमला करते हुए उसे गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी बताया। मायावती के मुताबिक, चुनाव आने पर सपा अलग-अलग समाजों को अपने साथ जोड़ने के लिए नए राजनीतिक नारे और समीकरण सामने लाती है। उन्होंने कहा कि पहले PDA में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को शामिल बताया गया था। अब अपर कास्ट, खासकर ब्राह्मण समाज को बसपा से जुड़ता देखकर सपा ने PDA में ‘P’ को पंडित से जोड़ दिया है। मायावती ने इसे सपा की राजनीतिक चाल बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी नेता या पार्टी को कुछ समय के लिए फायदा मिल सकता है, लेकिन इससे पूरे समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
मायावती ने जनता से की ऐसी राजनीति से बचने की अपील
मायावती ने अपने बयान में लोगों से जाति के नाम पर होने वाली राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों को बांटकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश लंबे समय में किसी के लिए फायदेमंद नहीं होती। बसपा प्रमुख ने कहा कि प्रदेश के लोगों को ऐसी राजनीति को समझने की जरूरत है और समाज के सभी वर्गों के हित की बात करने वाली राजनीति को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि संकीर्ण जातिवादी सोच से समाज में दूरी बढ़ सकती है। मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल अलग-अलग सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में PDA की नई परिभाषा को लेकर सपा और बसपा के बीच जुबानी जंग आगे भी देखने को मिल सकती है।
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