दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने वहां से हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। पुलिस का कहना है कि उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी, इसलिए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था। बताया जा रहा है कि लंबे समय से खाना नहीं खाने की वजह से उनका वजन 9 किलो से ज्यादा कम हो गया था। सुबह हुई इस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों और छात्रों में नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध भी किया।
डिंपल यादव ने सरकार पर साधा निशाना
सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वालों की आवाज दबाई जा रही है। डिंपल यादव ने कहा कि किसी की बात सुनने के बजाय उसे जबरन हटाना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उनका कहना है कि हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार को विरोध की आवाज सुननी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
संजय सिंह ने भी जताई नाराजगी
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों की मांग सुननी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहा है तो उसके साथ इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को सही बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे गलत मान रहे हैं। इसी वजह से यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण बढ़ी चिंता
पिछले कुछ दिनों से डॉक्टर लगातार सोनम वांगचुक की सेहत पर नजर रख रहे थे। मेडिकल रिपोर्ट में उनकी कमजोरी और तेजी से घटते वजन को लेकर चिंता जताई गई थी। डॉक्टरों का कहना था कि लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी वजह से पुलिस और प्रशासन ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल डॉक्टर उनकी जांच कर रहे हैं और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि उनकी सेहत में कितना सुधार होता है और आगे आंदोलन किस दिशा में जाता है।
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