दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों को प्रदर्शन स्थल से हटाया। दीपके ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई और कुछ लोगों को जबरन वहां से ले जाया गया। हालांकि, इन दावों को लेकर पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर जंतर-मंतर पर देर रात ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद अचानक यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया।
पहले हमले की कोशिश का भी किया गया था दावा
अभिजीत दीपके ने इससे पहले भी एक पोस्ट में दावा किया था कि जंतर-मंतर पर कुछ लोगों ने सोनम वांगचुक के पास कोई वस्तु फेंकने की कोशिश की थी। उनके अनुसार, इस घटना में वांगचुक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और वे पूरी तरह सुरक्षित रहे। दीपके का कहना है कि कुछ समय पहले उन्हें यह जानकारी मिली थी कि प्रदर्शन को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए माहौल खराब करने की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है और समर्थक लगातार इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
Delhi Police is cracking down at Jantar Mantar. Beating up people and taking away Sonam sir forcefully
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 18, 2026
विपक्ष के समर्थन से बढ़ा राजनीतिक दबाव
सोनम वांगचुक के आंदोलन को विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आंदोलनकारियों की बात सुनने के बजाय दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, समर्थकों का कहना है कि यह आंदोलन छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जंतर-मंतर पर हुए कथित घटनाक्रम और सोनम वांगचुक को हटाए जाने के दावों ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में प्रशासन, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच क्या रुख सामने आता है और क्या इस विवाद का कोई समाधान निकल पाता है।
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