तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) ने दिल्ली में आयोजित एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान एक बेहद विवादित बयान देकर देश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की पकड़ मुख्य रूप से दक्षिण भारत में इसलिए मजबूत है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक रूप से भगवान राम को ‘चोरी’ कर लिया है। रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) ने उत्तर और दक्षिण भारत के लोगों की धार्मिक मान्यताओं की तुलना करते हुए कहा कि उत्तर भारत के लोग आर्य हैं और राम के भक्त हैं, जबकि दक्षिण के लोग द्रविड़ हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं।
‘हर-हर महादेव’ पर घेरा, अमीरों और गरीबों से जोड़ा
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए तेलंगाना सीएम ने भाजपा की बयानबाजी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हमेशा ‘जय श्री राम’ का नारा ही क्यों लगाती है, वे कभी मंच से ‘हर-हर महादेव’ क्यों नहीं बोलते? रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) यहीं नहीं रुके, उन्होंने भगवान का सामाजिक विभाजन करते हुए कहा कि भगवान राम अमीरों के देवता हैं और भगवान शिव गरीबों के भगवान हैं। चुकी बीजेपी अमीरों की पार्टी है, इसलिए वह सिर्फ राम का नाम लेती है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब विपक्षी दल ‘हर-हर महादेव’ बोलते हैं, तो सत्ता पक्ष को यह रास नहीं आता।
केंद्रीय मंत्री बंदी संजय का जोरदार पलटवार
सीएम रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy)के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। केंद्रीय राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर तेलंगाना सीएम को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy), जो पहले ‘मुस्लिम ही कांग्रेस है’ जैसा बयान दे चुके हैं, अब आस्था के नाम पर लोगों को बांटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि तेलंगाना में भद्राचलम (दक्षिण अयोध्या) और वेमुलावाड़ा (दक्षिण काशी) दोनों मौजूद हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति को भगवान शिव और भगवान राम को उत्तर-दक्षिण की सीमाओं में नहीं बांधना चाहिए।
SIR के खिलाफ ‘साइमन गो बैक’ जैसा आंदोलन खड़ा करने की चेतावनी
राजनीतिक बयानों के अलावा रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने SIR (विशेष निवेश क्षेत्र/नीतियों) को ‘वोट काटने और बीजेपी को चुनावी फायदा पहुंचाने’ की साजिश बताया। रेड्डी ने अपील की कि ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और एम.के. स्टालिन जैसे विपक्षी नेताओं को एक साथ मिलकर ‘SIR, गो बैक’ का राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाना होगा, ठीक वैसा ही जैसा आजादी के दौरान साइमन कमीशन के खिलाफ हुआ था। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए शिक्षा और ‘यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी’ पर किए जा रहे काम को रेखांकित किया।
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