उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक ऐतिहासिक मकबरे में हुई तोड़फोड़ की घटना ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। भीम आर्मी प्रमुख और आज़ाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद ने इस मामले में यूपी सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना एलानिया तरीके से हो गई, लेकिन पुलिस, इंटेलिजेंस और एलआईयू सब खामोश रहे। उनका आरोप है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत हो रहा है, ताकि जनता के बुनियादी सवाल—रोजगार, महंगाई और शिक्षा—से ध्यान भटकाया जा सके।
1992 का संदर्भ और राजनीति
चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने बयान में 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस का संदर्भ देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार समाज में धार्मिक तनाव पैदा कर वही माहौल दोहराना चाहती है। उनका कहना है कि जब पुलिस और खुफिया एजेंसियों की मौजूदगी में यह घटना होती है, तो साफ है कि इसकी योजना सत्ता के संरक्षण में बनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।
विपक्ष की मांग और जनभावना
इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। स्थानीय लोगों में गुस्सा है और वे प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है, और इसकी विफलता को किसी भी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चंद्रशेखर आज़ाद ने यह भी कहा कि अगर सरकार सच में न्याय चाहती है, तो दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं और उन्हें कानून के तहत सख्त सजा दी जाए।
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