लखनऊ में आयोजित करणी सेना के स्वाभिमान संकल्प कार्यक्रम के दौरान संगठन के अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने रोहिणी घावरी (Rohini Ghavri) को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने रोहिणी की तुलना बसपा प्रमुख मायावती से करते हुए कहा कि वह उनसे लाख गुना बेहतर हैं। अम्मू ने वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में रोहिणी घावरी (Rohini Ghavri) को नगीना सीट से चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा भी की। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
रोहिणी और चंद्रशेखर आजाद के बीच विवाद
डॉ. रोहिणी घावरी (Rohini Ghavri) पिछले कुछ समय से नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर रोहिणी (Rohini Ghavri) ने चंद्रशेखर आजाद पर निजी संबंधों में धोखा देने के आरोप लगाए थे। स्विट्जरलैंड से करीब छह साल बाद भारत लौटने के बाद उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है। इसी बीच करणी सेना अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने सार्वजनिक मंच से उनका समर्थन किया। हालांकि, रोहिणी घावरी (Rohini Ghavri) को चुनाव लड़ाने का ऐलान फिलहाल अम्मू की ओर से किया गया राजनीतिक बयान है। इसे किसी पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवारी या चुनावी घोषणा नहीं माना जा सकता।
आरक्षण में वर्गीकरण को लेकर रोहिणी का रुख
कार्यक्रम में पहुंचीं रोहिणी घावरी (Rohini Ghavri) ने आरक्षण में वर्गीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग आरक्षण व्यवस्था में वर्गीकरण चाहता है। रोहिणी घावरी (Rohini Ghavri) के मुताबिक, सरकार की ओर से लाए जा रहे कुछ नियम समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में विभाजन नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार लोगों की बात नहीं सुनेगी तो जनता सरकार बदलने का फैसला कर सकती है। रोहिणी घावरी (Rohini Ghavri) की हालिया सार्वजनिक गतिविधियों में वाल्मीकि समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी प्रमुखता से सामने आई है।
राम मंदिर और परिवारवाद पर भी बोले अम्मू
करणी सेना अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल विश्व हिंदू परिषद या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण के संघर्ष में अन्य लोगों का भी योगदान रहा है। अम्मू ने कहा कि मंदिर से जुड़े हिसाब-किताब के अधिकार में उन लोगों की भी भागीदारी होनी चाहिए, जिन्होंने इसके लिए संघर्ष और सहयोग किया। उन्होंने देश को जाति आधारित राजनीति से बाहर निकालने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर परिवारवाद से बाहर आने की टिप्पणी की और यूजीसी कानून वापस लेने की मांग भी रखी।
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