यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर बिहार में NDA के भीतर मतभेद के संकेत मिलने के बाद जनता दल यूनाइटेड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, अशोक चौधरी और अन्य नेताओका नीतीश के आवास पर पहुंचना मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में संगठन, सरकार और पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब जेडीयू नेता श्याम रजक ने UCC को लेकर कड़ा विरोध जताया था।
श्याम रजक के बयान से शुरू हुआ विवाद
जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक श्याम रजक ने सोमवार, 14 सितंबर को कहा था कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद NDA के भीतर मतभेद की चर्चा शुरू हो गई। केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद जेडीयू की ओर से UCC पर अलग रुख सामने आया है। इसी पृष्ठभूमि में नीतीश कुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक को अहम माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के बाद पार्टी की ओर से UCC पर कोई अंतिम फैसला या आधिकारिक रुख सामने नहीं आया है।
विजय चौधरी बोले- पहले बिल के प्रावधान सामने आने दीजिए
बैठक के बाद बिहार के डिप्टी सीएम और जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि अभी UCC के प्रस्तावित कानून का पूरा स्वरूप सार्वजनिक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने गृह मंत्री अमित शाह का बयान सुना है, लेकिन जब तक बिल के प्रावधान सामने नहीं आते, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। चौधरी के मुताबिक, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। इसके बाद पार्टी के नेता आपस में चर्चा करके आगे का निर्णय लेंगे। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल पार्टी ने कोई अंतिम स्टैंड तय नहीं किया है।
चिंता हुई तो केंद्र से बातचीत करेगी JDU
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिल आने के बाद उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। यदि उसमें ऐसा कोई विषय सामने आता है, जिससे पार्टी या समाज के किसी वर्ग को परेशानी हो सकती है, तो जेडीयू केंद्र सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती है कि कानून बनाते समय सभी लोगों के हितों और विचारों को ध्यान में रखा जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि बिल में विवाद जैसी कोई बात नहीं होगी, तो उसका बिना वजह विरोध करने का सवाल नहीं उठता। ऐसे में अब सबकी नजरें संजय झा की गृह मंत्री से होने वाली मुलाकात और उसके बाद जेडीयू के आधिकारिक रुख पर टिकी हैं।
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