तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। AIADMK के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री एम.आर. विजयभास्कर ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। उनके इस फैसले के बाद राज्य की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि विजयभास्कर जल्द ही मुख्यमंत्री थलापति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
लगातार कमजोर होती AIADMK
एम.आर. विजयभास्कर का इस्तीफा AIADMK के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद यह पार्टी छोड़ने वाले छठे विधायक बन गए हैं। इससे पहले भी कई विधायक पार्टी से अलग होकर टीवीके में शामिल हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व, खासकर महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी की चिंता बढ़ा दी है। विजयभास्कर जयललिता सरकार में परिवहन मंत्री रह चुके हैं और करूर क्षेत्र से एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनके जाने से पार्टी की राजनीतिक स्थिति और कमजोर होती दिखाई दे रही है।
विधानसभा का बदला समीकरण
लगातार इस्तीफों और एक सीट खाली होने के कारण अब तमिलनाडु विधानसभा की कुल सात सीटें रिक्त हो चुकी हैं। इनमें सबसे चर्चित सीट त्रिची ईस्ट है, जिसे मुख्यमंत्री थलापति विजय ने दो सीटों से चुनाव जीतने के बाद नियमों के तहत छोड़ा था। मौजूदा विधानसभा में 234 सीटें हैं, जिनमें टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। वहीं डीएमके के खाते में 59, AIADMK के पास 47 और कांग्रेस के पास 5 सीटें हैं। ऐसे में आगामी उपचुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनके नतीजे भविष्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।
उपचुनाव से पहले तेज हुई सियासी गतिविधियां
राज्य में खाली हुई सीटों पर जल्द उपचुनाव होने की संभावना है। इसे देखते हुए सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। AIADMK ने भी संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से 1 जुलाई को अपनी महिला विंग की अहम बैठक बुलाई है, जिसकी अध्यक्षता एडप्पादी के. पलानीस्वामी करेंगे। दूसरी ओर, यदि एम.आर. विजयभास्कर वास्तव में टीवीके में शामिल होते हैं, तो इसे मुख्यमंत्री थलापति विजय के लिए एक और बड़ी राजनीतिक सफलता माना जाएगा। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
