UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के भीतर असंतोष सामने आया है। चंदौली में पार्टी से जुड़े दर्जनों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) के सामने संगठन को संभालने की चुनौती बढ़ सकती है। नाराज नेताओं में युवा मोर्चा के वाराणसी मंडल प्रमुख महासचिव दीपक राजभर और युवा मंडल अध्यक्ष एवं मंत्री प्रतिनिधि बबलू राजभर के नाम शामिल हैं। दीपक राजभर ने नेतृत्व पर आरोप लगाया कि पार्टी अपने पुराने विचारों और जिन मुद्दों को लेकर बनाई गई थी, उनसे दूर होती जा रही है। उनका कहना है कि लंबे समय से संगठन के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं मिल रहा। इन नेताओं ने दावा किया कि अगर स्थिति नहीं बदली तो आने वाले दिनों में और भी लोग पार्टी छोड़ सकते हैं। हालांकि, इस्तीफे की घोषणा करने वाले सभी नेताओं की अंतिम स्थिति और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इस घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा
पार्टी छोड़ने का ऐलान करने वाले नेताओं ने संगठन के कामकाज और समाज की समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई है। बबलू राजभर का आरोप है कि जिन लोगों के समर्थन से पार्टी मजबूत हुई, उनके इलाकों में आज भी सड़क, नाली, खड़ंजा और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी परेशानियां बनी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि इन समस्याओं को लेकर कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक, संगठन के पदाधिकारियों ने 16 तारीख को अंबेडकर नगर में ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) के सामने पार्टी की स्थिति सुधारने की जरूरत भी रखी थी। इसके बावजूद उनकी शिकायतों पर आगे बातचीत नहीं हुई। वहीं, दीपक राजभर ने कहा कि कई कार्यकर्ता दो दशक से अधिक समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। नाराज नेताओं का आरोप है कि गांवों में प्रचार करने और संगठन के लिए संसाधन जुटाने वाले लोगों की तुलना में प्रभावशाली व्यक्तियों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। ये सभी आरोप इस्तीफा देने की घोषणा करने वाले नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। इन पर सुभासपा नेतृत्व का पक्ष सामने आना बाकी है।
2027 के टिकट बंटवारे पर भी विवाद
सुभासपा के नाराज नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि राजभर समाज के वोटों का राजनीतिक लाभ तो लिया जाता है, लेकिन चुनाव लड़ने का अवसर देने के मामले में समाज के लोगों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। दीपक राजभर ने 2022 के सपा-सुभासपा गठबंधन का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि उस चुनाव में पार्टी को 16 सीटें मिलने के बावजूद राजभर समाज के कितने उम्मीदवारों को मौका दिया गया था। उन्होंने आशंका जताई कि 2027 में भी टिकट बंटवारे को लेकर ऐसी स्थिति बन सकती है। नाराज नेताओं ने कहा कि अब समाज के लोग अपने अधिकार, राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान को ध्यान में रखकर फैसला करेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में सभी दल अगले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी संविधान दिवस पर पार्टी का ‘जन-मन का मेनिफेस्टो’ जारी करने की बात कह चुके हैं। फिलहाल, सुभासपा में उठी नाराजगी कितनी बड़ी चुनौती बनती है, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। पार्टी नेतृत्व इन नेताओं को मनाने की कोशिश करता है या संगठन में कोई बड़ा बदलाव होता है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।
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