दिल्ली में इस बार दशहरा समारोह के दौरान रावण, मेघनाद और कुंभकरण के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। पीतमपुरा के नेताजी सुभाष प्लेस (NSP) मैदान में केशव रामलीला समिति ने यह खास तैयारी की है। समिति का कहना है कि कॉकरोच को गंदगी के प्रतीक के रूप में चुना गया है और इसके जरिए लोगों को साफ-सफाई का संदेश दिया जाएगा। इस फैसले के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “फ्री की पब्लिसिटी के लिए शुक्रिया।” उनके इस बयान के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, समिति की ओर से पुतला जलाने की वजह स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाना बताई गई है। ऐसे में इस आयोजन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
बीजेपी विधायक अशोक गोयल ने बताया क्यों चुना गया कॉकरोच का पुतला
मॉडल टाउन से बीजेपी विधायक अशोक गोयल देवराहा के मुताबिक, केशव रामलीला समिति हर साल रावण, मेघनाद और कुंभकरण के अलावा एक चौथा पुतला भी जलाती है। यह पुतला किसी ऐसी बुराई का प्रतीक होता है, जिसे समाज से दूर करने का संदेश दिया जा सके। उन्होंने बताया कि इससे पहले समिति आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं को दर्शाने वाले पुतले भी जला चुकी है। इस बार सदस्यों ने मिलकर गंदगी के प्रतीक के रूप में कॉकरोच को चुना है। अशोक गोयल का कहना है कि घर, आसपास के इलाकों और समाज में मौजूद गंदगी को दूर करना सभी की जिम्मेदारी है। इस पहल के जरिए लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और सफाई अभियान में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। विधायक ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच के पुतले का चयन सफाई से जुड़े संदेश के लिए किया गया है।
‘गंदगी हटाने का संदेश’, लेकिन बयानबाजी से क्यों जुड़ गया मामला?
अशोक गोयल ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचाना है। उनके मुताबिक, स्वच्छता केवल सरकार या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को इसमें योगदान देना चाहिए। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कुछ ऐसे लोगों पर भी टिप्पणी की, जिनके काम करने के तरीके को उन्होंने अराजक बताया और कहा कि वे संविधान तथा कानून का सम्मान नहीं करते। दूसरी ओर, अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट में इसे मुफ्त की पब्लिसिटी कहकर प्रतिक्रिया दी। इस तरह स्वच्छता के संदेश के लिए तैयार किया गया पुतला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। हालांकि, आयोजकों ने कॉकरोच के चयन को गंदगी से जोड़कर समझाया है। दशहरे पर इस अनोखे पुतले के दहन को लेकर लोगों की उत्सुकता बनी हुई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पहल से स्वच्छता का संदेश कितना प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचता है।
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