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ओमान में जहाज पर हुए हमले में यूपी के युवक की गई जान, सात महीने पहले कमाने गया था विदेश

देवरिया के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया की ओमान तट के पास एक व्यावसायिक जहाज पर हुए हमले में मौत हो गई। विदेश में नौकरी कर रहे शिवानंद की मौत की खबर से परिवार और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब विदेश में काम कर रहे उनके बेटे की मौत की खबर घर पहुंची। जिले के सुरौली थाना क्षेत्र के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया की ओमान तट के पास एक व्यावसायिक जहाज पर हुए हमले में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि शिवानंद एक शिपिंग कंपनी के जहाज पर वेल्डर के पद पर कार्यरत थे और नौकरी के सिलसिले में समुद्री यात्रा पर थे। घटना की सूचना मिलते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में जैसे ही यह खबर फैली, पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया और लोग परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंचने लगे।

बेहतर भविष्य के लिए विदेश गए थे, लेकिन नहीं लौट सके घर

परिजनों के अनुसार, शिवानंद चौरसिया करीब सात महीने पहले अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विदेश गए थे। वह सिंगापुर की एक शिपिंग कंपनी में कार्यरत थे और जहाज पर वेल्डिंग का काम करते थे। जानकारी के मुताबिक, जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय जहाज ओमान की खाड़ी के पास समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान जहाज पर हमला हुआ, जिसमें शिवानंद की जान चली गई। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द घर लौटेंगे और बच्चों के साथ समय बिताएंगे, लेकिन अचानक आई इस खबर ने सभी सपनों को तोड़ दिया। गांव के लोगों का कहना है कि शिवानंद मेहनती और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे, जो हमेशा अपने परिवार की खुशहाली के लिए संघर्ष करते रहे।

छोटे भाई के फोन से मिली दुखद सूचना, परिजनों में मचा कोहराम

इस दर्दनाक घटना की जानकारी सबसे पहले शिवानंद के छोटे भाई रामप्रवेश चौरसिया को मिली, जो दुबई में काम करते हैं। गुरुवार सुबह उन्होंने फोन पर परिवार को हादसे की सूचना दी। जैसे ही घरवालों को यह खबर मिली, पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई। बाद में जिला प्रशासन ने भी परिजनों से संपर्क कर घटना की पुष्टि की। शिवानंद अपने परिवार के बड़े बेटे थे और घर की अधिकतर जिम्मेदारियां उन्हीं के कंधों पर थीं। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। पांच साल का बेटा राजवीर और दो साल की बेटी वानिका अभी इतने छोटे हैं कि उन्हें अपने पिता के हमेशा के लिए दूर चले जाने का एहसास भी नहीं है। गांव के लोग परिवार की स्थिति देखकर भावुक हो रहे हैं और हर संभव मदद की बात कह रहे हैं।

प्रशासन पहुंचा घर, परिवार ने मांगी सरकारी सहायता

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया। तहसील और प्रशासनिक अधिकारियों ने मृतक के घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शासन स्तर पर जो भी सहायता संभव होगी, उसे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं ग्रामीणों और परिजनों ने सरकार से मांग की है कि शिवानंद के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई और परिवार का भविष्य सुरक्षित रह सके। गांव के लोगों का कहना है कि परिवार की आय का मुख्य स्रोत शिवानंद ही थे और उनके निधन के बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ सकता है। फिलहाल पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है कि परिवार इस बड़े दुख से कैसे उबर पाएगा।

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