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पैर कटा, हाथ का ऑपरेशन, चेहरा भी जला… ईरान के सुप्रीम लीडर की होगी सर्जरी? समाने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की हालत को लेकर कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें गंभीर चोटें लगी हैं और वह लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं।

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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि वह लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। उनकी कोई भी स्पष्ट तस्वीर या आवाज भी सामने नहीं आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद से उनके ज्यादातर संदेश लिखित रूप में ही सामने आ रहे हैं। इस वजह से उनके स्वास्थ्य और स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले पर नजर बनी हुई है।

युद्ध में गंभीर चोटों का दावा

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका से संघर्ष के दौरान उन्हें गंभीर चोटें लगी थीं। बताया जा रहा है कि उनके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं, जिनमें पैर और हाथ शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उनके पैर का कई बार ऑपरेशन हो चुका है और अब उन्हें कृत्रिम पैर (आर्टिफिशियल लेग) की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह उनके हाथ का भी ऑपरेशन हुआ है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। हालांकि ईरान सरकार की तरफ से उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

चेहरे पर चोटों के निशान, बोलने में भी दिक्कत का दावा

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि उनके चेहरे और होंठों पर गंभीर जलन के निशान हैं, जिसकी वजह से उन्हें बोलने में कठिनाई हो रही है। इसी कारण से उनके संदेश अक्सर लिखित रूप में ही सामने आते हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें भविष्य में प्लास्टिक सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन खबरों के सामने आने के बाद ईरान और बाहर दोनों जगह चिंता बढ़ गई है।

सुरक्षा के चलते गुप्त रखा गया ठिकाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई की सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं और उनका ठिकाना बेहद गोपनीय रखा गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और वरिष्ठ अधिकारी उनके संपर्क में हैं, लेकिन आमतौर पर किसी को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जाती। कहा जा रहा है कि उनकी सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि उनके स्थान की जानकारी बाहर न पहुंच सके। राष्ट्रपति और स्वास्थ्य मंत्री उनके इलाज और देखभाल में शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि उनसे संपर्क केवल भरोसेमंद संदेशवाहकों के जरिए किया जाता है।

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