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तिहाड़ से बाहर क्यों नहीं जा सकता अनमोल बिश्नोई? केंद्र सरकार के फैसले ने खोल दिया बड़ा राज

अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। एनआईए कोर्ट के आदेश के बाद उसे तिहाड़ जेल में ही रखा जाएगा और किसी अन्य राज्य को कस्टडी नहीं दी जाएगी।

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लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई और कुख्यात अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई को लेकर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार 11 दिसंबर को विशेष एनआईए अदालत ने अनमोल बिश्नोई को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल में ही रखा जाएगा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से दाखिल की गई अर्जी को अदालत ने स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया था कि अनमोल बिश्नोई को फिलहाल किसी अन्य राज्य की जेल या पुलिस कस्टडी में भेजना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं होगा। अदालत के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि अनमोल बिश्नोई पर चल रही जांच को अब पूरी तरह केंद्रीय एजेंसियां ही नियंत्रित करेंगी और राज्य पुलिस की भूमिका सीमित रहेगी।

पुलिस रिमांड खत्म, न्यायिक हिरासत की मांग मंजूर

एनआईए के विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने सुनवाई के बाद मीडिया को बताया कि अनमोल बिश्नोई की पुलिस रिमांड बुधवार को समाप्त हो गई थी। इसके बाद एजेंसी ने अदालत से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने और तिहाड़ जेल में रखने की अनुमति मांगी थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अनमोल बिश्नोई का नेटवर्क कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है, ऐसे में उसकी आवाजाही या अलग-अलग राज्यों को कस्टडी देने से जांच और सुरक्षा दोनों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। अदालत ने इन तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि मौजूदा हालात में उसे तिहाड़ जेल में रखा जाना ही सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प है। इस आदेश के साथ ही यह भी संकेत मिला कि आने वाले समय में अनमोल बिश्नोई से जुड़े मामलों की सुनवाई और पूछताछ मुख्य रूप से एनआईए के दायरे में ही रहेगी।

जान का खतरा बना वजह: वर्चुअल पेशी का फैसला

अनमोल बिश्नोई की पेशी को लेकर भी अदालत ने असाधारण व्यवस्था अपनाई। गंभीर सुरक्षा खतरे को देखते हुए उसे अदालत में फिजिकली पेश नहीं किया गया, बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी पेशी कराई गई। इससे पहले अनमोल बिश्नोई ने खुद अदालत में एक अर्जी दाखिल कर दावा किया था कि उसकी जान को गंभीर खतरा है। इस अर्जी के बाद अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए सुनवाई की जगह भी बदल दी और इसे एनआईए मुख्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि अनमोल बिश्नोई न केवल संगठित अपराध से जुड़ा है, बल्कि उसका नाम कई हाई-प्रोफाइल मामलों में भी सामने आ चुका है। ऐसे में अदालत परिसर तक लाना-ले जाना भी बड़े सुरक्षा जोखिम को जन्म दे सकता है, जिस वजह से वर्चुअल पेशी को ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना गया।

केंद्र सरकार का आदेश: क्यों नहीं मिलेगी राज्यों को कस्टडी

सूत्रों के अनुसार, अनमोल बिश्नोई को तिहाड़ जेल में ही रखने और किसी अन्य राज्य को उसकी कस्टडी न देने के पीछे केंद्र सरकार का स्पष्ट आदेश है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि अनमोल बिश्नोई का आपराधिक नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है और यदि उसे राज्य पुलिस की कस्टडी में भेजा गया तो उसके फरार होने, नेटवर्क को सक्रिय करने या जांच को प्रभावित करने का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में ले जाने के दौरान उस पर हमले या उसे छुड़ाने की कोशिश जैसी आशंकाएं भी जताई गई हैं। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि अनमोल बिश्नोई को एक ही सुरक्षित स्थान, यानी तिहाड़ जेल में रखा जाए और उसकी पेशी व पूछताछ केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी में ही हो। यह फैसला न केवल जांच को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि सरकार संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ किसी भी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं है।

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