उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक विवादित होर्डिंग को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। शहर के बाईपास क्षेत्र में लगाए गए एक पोस्टर में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक टिप्पणी लिखी गई थी। जैसे ही इसकी जानकारी समाजवादी पार्टी के नेताओं को मिली, पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। मामला तेजी से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गई। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में पोस्टर और होर्डिंग की सियासत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मौके पर पहुंचे सपा सांसद, पोस्टर हटाकर जलाया
विवादित होर्डिंग की सूचना मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया सीधे मौके पर पहुंचे। उन्होंने पोस्टर को हटवाया और बाद में उसे जला दिया। इस दौरान उनके साथ पार्टी के कई कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सांसद ने इस घटना को राजनीतिक माहौल खराब करने की कोशिश बताया। उनका कहना था कि इस तरह के पोस्टर लगाकर समाज में तनाव पैदा करने और विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की लड़ाई हो सकती है, लेकिन इस तरह के तरीके स्वीकार नहीं किए जा सकते। पोस्टर हटाए जाने के बाद इलाके में कुछ समय तक लोगों की भीड़ भी जुटी रही।
सपा ने लगाए गंभीर आरोप, जांच की मांग
घटना के बाद सांसद आनंद भदौरिया ने स्थानीय प्रशासन और कुछ सरकारी विभागों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने व्यस्त मार्ग पर बिना किसी जानकारी के ऐसे पोस्टर लग जाना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना था कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर पोस्टर लगाने के पीछे कौन लोग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। सपा नेताओं का आरोप है कि इस तरह की घटनाएं राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से की जा रही हैं। पार्टी का कहना है कि वह इस पूरे मामले को अपने शीर्ष नेतृत्व के सामने भी रखेगी और आगे की रणनीति तय करेगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब सीतापुर में इस तरह का विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी शहर में कुछ जगहों पर राजनीतिक नेताओं से जुड़े विवादित पोस्टर लगाए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस वजह से राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन की आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है। प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में पोस्टर लगाने वालों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
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