लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऐसा बयान दिया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि देश में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नई-नई तकनीकों पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने रोपवे, केबल कार और अन्य आधुनिक यातायात प्रणालियों का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में “हवा में उड़ने वाली बस” जैसी तकनीक भी भारत में देखने को मिल सकती है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई और लोग यह जानने के लिए उत्सुक हो गए कि आखिर यह नई योजना क्या है और इसका आम लोगों को कितना फायदा मिल सकता है।
इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित नई परिवहन व्यवस्था की तैयारी
नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में कहा कि भविष्य की परिवहन व्यवस्था तेज, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होगी। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक तकनीक आधारित मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि इस तरह की व्यवस्था लोगों को कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद करेगी। गडकरी ने यह भी याद दिलाया कि देश में पानी पर चलने वाले और पानी में उतरने वाले विमानों जैसी नई तकनीकों को भी बढ़ावा दिया गया है। अब सरकार शहरी और अंतर-शहरी परिवहन को और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। हालांकि उन्होंने इस परियोजना की समय-सीमा या स्थान को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से सफर हुआ आसान
इस अवसर पर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की शुरुआत भी हुई, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। करीब 63 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे दोनों शहरों के बीच यात्रा को काफी आसान बना देगा। पहले जहां लखनऊ से कानपुर पहुंचने में ढाई से तीन घंटे तक लग जाते थे, वहीं अब यह दूरी लगभग 35 से 45 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले हजारों लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा। ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। इस परियोजना को आधुनिक सड़क नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
कई वर्षों की मेहनत के बाद तैयार हुआ एक्सप्रेसवे
इस एक्सप्रेसवे की आधारशिला वर्ष 2018 में रखी गई थी और इसे तैयार करने में लगभग 4500 करोड़ रुपये की लागत आई है। परियोजना को दो हिस्सों में विकसित किया गया, जिसमें एक एलिवेटेड सेक्शन और दूसरा ग्रीनफील्ड सेक्शन शामिल है। यह मार्ग कई गांवों से होकर गुजरता है और इसके निर्माण के लिए बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण किया गया था। निर्माण कार्य के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां भी सामने आईं, लेकिन समय के साथ उन्हें पूरा कर लिया गया। ट्रायल रन सफल रहने के बाद अब यह एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगी और भविष्य में क्षेत्रीय विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।
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