पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बुधवार को तीसरी लिस्ट जारी की, जिसमें 19 उम्मीदवारों के नाम शामिल थे। इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी आरजी कर पीड़िता की मां को पानीहाटी से उम्मीदवार बनाना। बीजेपी का यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरी प्रतिक्रियाएं पैदा कर रहा है।
TMC नेता कुणाल घोष ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि पीड़िता की मां का नाम उम्मीदवार के रूप में आने पर उनका पूरा सम्मान है और उनके प्रति सहानुभूति है, लेकिन साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह कदम पीड़िता के परिवार के सम्मान के साथ न्याय करता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पीड़िता के माता-पिता की न्यायिक लड़ाई और संघर्ष की भावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया गया है।
टीएमसी का आरोप और सवाल
कुणाल घोष ने कहा कि पीड़िता के साथ हुए दुष्कर्म की घटना को सभी ने निंदा की थी। कोलकाता पुलिस ने मामले की जांच कर दोषी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया। पीड़िता के माता-पिता ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी, जिसे बाद में मंजूरी मिली। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की जांच को मॉनिटर किया और सही ठहराया।
कुणाल घोष ने कहा कि अब जब पीड़िता की मां बीजेपी की उम्मीदवार बन गई हैं, तो यह सवाल उठता है कि वह उसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व क्यों कर रही हैं, जिसके अधीन सीबीआई आती है। उन्होंने कहा, “पीड़िता के माता-पिता ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से न्याय की मांग की थी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अब वही परिवार राजनीतिक दल की उम्मीदवार बन गया, जिससे जनता के मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं।”
चुनावी माहौल और बीजेपी की रणनीति
बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने पश्चिम बंगाल की 19 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की। इसमें कई प्रमुख जिलों को कवर किया गया है, जैसे कि कूचबिहार दक्षिण, राजगंज, इस्लामपुर, हेमताबाद, इंग्लिश बाजार, शांतिपुर, पानीहाटी, हावड़ा मध्य, उत्तरपाड़ा, सिंगूर, चंदननगर, चूंचुड़ा, हरिपाल, तमलुक, मेदिनीपुर, पूर्वस्थली दक्षिण, कटवा, सैंथिया और नलहाटी।
विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी ने इस कदम के जरिए चुनावी संवेदनशीलता और सहानुभूति का लाभ उठाने की कोशिश की है। वहीं टीएमसी इसे राजनीतिक अवसर का दुरुपयोग बताते हुए सवाल उठा रही है कि क्या पीड़िता के परिवार का सम्मान और न्याय की भावना इस कदम से प्रभावित हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह विषय अभी और लंबी बहस का हिस्सा बनने वाला है।
जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से न केवल बीजेपी को मीडिया कवरेज मिलेगा, बल्कि यह विपक्ष और टीएमसी के लिए भी रणनीतिक चुनौती बन सकता है। कुणाल घोष ने साफ कहा कि “हम पीड़िता के परिवार और उनके संघर्ष का सम्मान करते हैं, लेकिन राजनीति में इस तरह की कदम उठाने से संवेदनशील मुद्दे को लेकर लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।”
सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। कई लोग सहानुभूति जताते हुए इसे राजनीतिक इस्तेमाल मान रहे हैं, तो कुछ ने कहा कि यह चुनावी लोकतंत्र का हिस्सा है और सभी को समान अवसर का अधिकार है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में प्रचार और वोटिंग पैटर्न पर असर डाल सकता है।
इस पूरे विवाद के बीच, बीजेपी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संवेदनशील मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है। लेकिन टीएमसी और विपक्ष इस कदम को आलोचना की दृष्टि से देख रहे हैं।
