भीतरी बगावत से हिला ममता का किला, ‘असली तृणमूल’ का दावा
बंगाल की राजनीति में यह पहली बार है जब ममता बनर्जी को अपनी ही पार्टी के भीतर इतने बड़े स्तर पर विरोध झेलना पड़ रहा है। संसद से लेकर विधानसभा तक बगावत के सुर तेज हैं। खबर है कि टीएमसी के कम से कम 60 विधायक इस समय पहली बार चुनकर आए विधायक रितब्रता बनर्जी का समर्थन कर रहे हैं, जो खुद को ‘असली तृणमूल’ बताकर ममता की लीडरशिप को चुनौती दे रहे हैं। केवल शताब्दी रॉय ही नहीं, बल्कि पिछले दो दिनों के भीतर सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे कद्दावर सांसदों ने भी टीएमसी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर पार्टी को बैकफुट पर ला दिया है। नेताओं का आरोप है कि जनता के जनादेश का सम्मान करने के लिए अब एनडीए का साथ देना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
समीक्षा बैठक का वो किस्सा, जब ममता ने सच मानने से कर दिया इनकार
शताब्दी रॉय ने पार्टी छोड़ने के पीछे की मुख्य वजहों का खुलासा करते हुए ममता बनर्जी की एक इंटरनल मीटिंग का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने नतीजों पर चर्चा के लिए सभी नेताओं की बैठक बुलाई थी। बैठक में मौजूद हर शख्स को पता था कि हार की असली वजह क्या है, लेकिन ममता बनर्जी अपनी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं थीं। उन्होंने बैठक में कहा कि ‘हम बीजेपी से हारे नहीं हैं, बल्कि वे हमें डरा-धमका रहे हैं।’ शताब्दी के अनुसार, ममता के इस अड़ियल रुख के कारण कोई भी नेता खुलकर अपनी राय नहीं रख पाया। जब ममता ने शिकायतें लिखकर देने की बात कही, तो नेताओं ने साफ किया कि अब लिखने का समय नहीं है, बल्कि तुरंत कड़े फैसले लेने की जरूरत है।
अभिषेक, I-PAC और भ्रष्टाचार: शताब्दी ने खोल दी टीएमसी की पोल
सांसद शताब्दी रॉय ने साफ शब्दों में कहा कि टीएमसी की बर्बादी के पीछे भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसे ममता बनर्जी लगातार नजरअंदाज कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पार्टी को इस बात का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए था कि आखिर जनता उनसे दूर क्यों हुई। शताब्दी ने इसके लिए सीधे तौर पर चुनावी रणनीतिकार कंपनी I-PAC, ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी और जमीनी स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह ममता बनर्जी के लिए बहुत बुरा महसूस कर रही हैं और उनके बिना रहने की कल्पना करना भी मुश्किल है, लेकिन आज ममता की हालत बेहद खराब हो चुकी है। शताब्दी ने यह भी संकेत दिया कि अब टीएमसी के पास अस्तित्व बचाने का आखिरी रास्ता यही है कि वह खुद का विलय कांग्रेस में कर ले।
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