झारखंड की राजधानी रांची से लेकर जमशेदपुर तक इस समय मातम का एक ऐसा साया पसरा हुआ है, जिसने हर संवेदनशील इंसान को अंदर से झकझोर कर रख दिया है। झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के घर पर जो हुआ, उसे शब्दों में बयां कर पाना किसी भी पत्थर दिल इंसान के लिए भी मुमकिन नहीं है। बुधवार की आम रात जैसी ही अन्य रातों की तरह शुरू हुई थी, जहां चार युवा दोस्त आपस में मिले और कुछ वक्त साथ बिताने के बाद शहर की सड़कों पर घूमने निकले। लेकिन किसे पता था कि चंद घंटों के भीतर यह सुहानी रात जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी। मरीन ड्राइव के पास सड़क किनारे खड़े एक भारी-भरकम ट्रक से जब उनकी तेज रफ्तार कार जा टकराई, तो पलभर में सब कुछ तहस-नहस हो गया। इस भीषण और दर्दनाक हादसे ने सिर्फ चार हंसते-खेलते युवाओं की सांसे ही नहीं छीनीं, बल्कि उनके मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा और उम्मीदों की दुनिया को भी हमेशा-हमेशा के लिए उजाड़ कर रख दिया।
मंत्री मां की चीखों ने चीर दिया कलेजा
जब जमशेदपुर से मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की 18 वर्षीय बेटी तृषा सिंह का पार्थिव शरीर रांची स्थित उनके सरकारी आवास पर पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स का गला रुंध गया। घर के भीतर और बाहर का माहौल पूरी तरह से गमगीन हो चुका था, और चारों तरफ सिर्फ सिसकियों की आवाजें गूंज रही थीं। मां दीपिका के लिए यह पल किसी वज्रापात से कम नहीं था, जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनी लाडली को बड़ा किया था और जिसके सुनहरे भविष्य के तमाम सपने संजो रखे थे। अपनी बेटी के शव को देखते ही मां का सब्र टूट गया और वह दहाड़ें मारकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। इस असीम दुख की घड़ी में मंत्री दीपिका को ढांढस बंधाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन खुद उनके आवास पर पहुंचे। सीएम सोरेन ने परिवार को इस असहनीय दर्द को सहने की ताकत देने के लिए सांत्वना दी, लेकिन वहां मौजूद किसी भी बड़े नेता या अधिकारी की आंखें भी इस दृश्य को देखकर नम होने से खुद को रोक नहीं पाईं।
मूसलाधार बारिश के बीच नम आंखों से हुई अंतिम विदाई
गुरुवार की शाम जब रांची के धुर्वा स्थित सीठियो श्मशान घाट के लिए तृषा की अंतिम यात्रा रवाना हुई, तो आसमान ने भी मानो इस दुख में अपना आंचल भिगो दिया। मूसलाधार बारिश के बीच सैकड़ों की संख्या में आम लोग, रिश्तेदार और राजनीतिक हस्तियां तृषा को अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर उतरे। श्मशान घाट पर जब तृषा के पिता रत्नेश सिंह ने अपनी बेटी के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर एक व्यक्ति का कलेजा कांप उठा। मां दीपिका पांडेय सिंह अपनी बेटी की अर्थी के पास बार-बार सुध-बुध खो बैठती और उनका रो-रोकर बुरा हाल था। बारिश की बूंदों के साथ बहते मां के आंसू और पिता का वीरान हो चुका चेहरा उस श्मशान घाट की खामोशी में एक ऐसा दर्द छोड़ गया, जिसे लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा। इस हादसे की विभीषिका इतनी गहरी थी कि राज्य सरकार को अगले दिन होने वाली अपनी महत्वपूर्ण मंत्रिपरिषद की बैठक तक को स्थगित करना पड़ा।
सड़क सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
यह दर्दनाक हादसा सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं था, बल्कि हमारी सड़कों पर बढ़ती लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान छोड़ गया है। इस वीभत्स दुर्घटना में तृषा सिंह के साथ-साथ उनके तीन अन्य गहरे दोस्तों—सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता और वंशिका खंडेलवाल की भी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और अंदर बैठे युवाओं को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला। इस घटना के बाद से पूरे झारखंड राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है और हर कोई यही सोच रहा है कि आखिर कब तक रात के अंधेरे में सड़कों पर खड़े अनियंत्रित वाहन और बेपरवाह रफ्तार यूं ही घरों के चिराग बुझाती रहेगी। सरकार और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद सड़क हादसों में हो रही इन मौतों ने एक बार फिर माता-पिता की रातों की नींद उड़ा दी है। इस हृदयविदारक घटना ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सुरक्षा के दावों के बीच हमारी और हमारे अपनों की जिंदगी आखिर कितनी सुरक्षित है।
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