Supreme Court ने हाल ही में एक तलाक मामले में पति को कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आज के समय में पति को घर के हर काम में पत्नी का हाथ बंटाना चाहिए, चाहे वह खाना बनाना हो, सफाई करना हो या कपड़े धोना। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि पत्नी को ये जिम्मेदारियां अकेले निभाने की उम्मीद करना सही नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं, आप जीवन साथी से शादी कर रहे हैं।” यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था। तलाक की मांग करने वाले पति ने दावा किया कि पत्नी का अनुचित व्यवहार और घर का काम न करना मानसिक क्रूरता का आधार है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार को नकारते हुए कहा कि घरेलू कामों में हिस्सेदारी को नजरअंदाज करके तलाक नहीं दिया जा सकता।
वक्त बदल चुका है, पति को भी जिम्मेदारी निभानी होगी
Supreme Court ने मौखिक रूप से कहा कि समय बदल चुका है और पति को भी घरेलू कामों में पत्नी के साथ बराबरी से हिस्सा लेना चाहिए। जस्टिस नाथ ने कहा, “आज का समय अलग है। खाना बनाना, सफाई करना, कपड़े धोना – ये सभी जिम्मेदारियां पति और पत्नी दोनों की हैं। यह तलाक का कारण नहीं बन सकता।” कोर्ट ने यह भी बताया कि तलाक की अर्जी पर निचली अदालत ने पति की मानसिक क्रूरता के आधार पर आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वे घर के काम में सक्रिय भूमिका निभाएं और सिर्फ पत्नी पर आरोप लगाने से समस्या हल नहीं होगी।
पत्नी का खाना न बनाना मानसिक क्रूरता का आधार नहीं
सुनवाई के दौरान पति के वकील ने कहा कि मध्यस्थता विफल हो गई और याचिकाकर्ता 2019 से अलग रह रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पत्नी का खाना न बनाना और घर के काम में सहयोग न करना मानसिक क्रूरता का आधार है। इस पर Supreme Court ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि ये आरोप वैध आधार नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जीवन साथी को केवल सेवा का अधिकारी नहीं समझा जा सकता। यह टिप्पणी पति-पत्नी के बीच समान जिम्मेदारी और सहयोग की जरूरत को दर्शाती है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया
इस मामले में Supreme Court ने अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की है। दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। अदालत ने यह भी कहा कि पति-पत्नी दोनों को जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों को निभाना होगा।सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय आज के समाज और बदलती सोच को दर्शाता है। कोर्ट ने घर के कामों को साझा जिम्मेदारी बताते हुए पति को जीवन साथी के रूप में बराबरी का हक और कर्तव्य निभाने का संदेश दिया है।
