केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ नेताओं और समर्थकों के जश्न मनाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। वीडियो में कई लोग खुशी जाहिर करते, नाचते और जश्न मनाते दिखाई दिए। इसके बाद इंटरनेट पर इस तरीके को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे आंदोलन की सफलता का उत्सव बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि छात्रों से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे के बीच इस तरह का जश्न उचित नहीं था। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गया और लोगों ने अलग-अलग राय रखनी शुरू कर दी।
सोनम वांगचुक ने जीत के साथ विनम्रता की दी सीख
जश्न के इन वायरल वीडियो पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन में सफलता मिलना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उसके बाद विनम्रता और जिम्मेदारी बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि जीत का उत्सव ऐसे तरीके से मनाया जाए जिससे आंदोलन की गरिमा बनी रहे और समाज में सकारात्मक संदेश जाए। वांगचुक का कहना था कि किसी भी जनआंदोलन का उद्देश्य केवल जीत हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों का विश्वास और सम्मान भी बनाए रखना होता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP के जश्न वाले वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं और उन पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
छात्र आंदोलन में निभाई थी अहम भूमिका
सोनम वांगचुक हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई थी, जहां उनका इलाज हुआ। कुछ दिनों बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उनके अनुसार, सरकार की ओर से छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने और परीक्षा से जुड़े प्रभावित परिवारों के लिए राहत संबंधी आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। इसी वजह से आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका लगातार चर्चा में रही और उनके हर बयान पर लोगों की नजर बनी रही।
CJP ने दिया जवाब, जश्न को बताया युवाओं की अभिव्यक्ति
वायरल वीडियो को लेकर बढ़ती आलोचनाओं के बीच CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वीडियो में युवाओं का उत्साह और उनकी सकारात्मक ऊर्जा दिखाई देती है। उनके मुताबिक आज की युवा पीढ़ी अपनी बात अलग-अलग तरीकों से रखती है और लोकतांत्रिक आंदोलन का स्वरूप समय के साथ बदल रहा है। उन्होंने कहा कि युवा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं, सांस्कृतिक तरीके से अपनी खुशी भी जाहिर कर सकते हैं और साथ ही अपने मुद्दों को मजबूती से उठा सकते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस अभी भी जारी है। कुछ लोग जश्न को स्वाभाविक मान रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि संवेदनशील मुद्दों से जुड़े आंदोलनों में उत्सव मनाने का तरीका अधिक संतुलित और मर्यादित होना चाहिए।
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