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गिरिराज सिंह का सनसनीखेज बयान, कहा- ‘पूर्वजों ने अगर सभी मुसलमानों को पाकिस्तान भेज दिया होता तो आज…’

गिरिराज सिंह के बयान से सियासत में हलचल। जानें क्यों उन्होंने ओवैसी पर साधा निशाना और देश के बंटवारे को लेकर क्या कहा।

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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर अपने बयान से राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर सीधा हमला बोला। गिरिराज सिंह ने कहा कि दुनिया के कई देशों की तुलना में भारत में मुसलमानों को ज्यादा सुविधाएं और आजादी मिली हुई है, इसके बावजूद कुछ लोग लगातार देश के खिलाफ बयान देते रहते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

बंटवारे को लेकर दिया बड़ा बयान

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए गिरिराज सिंह ने देश के विभाजन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत का बंटवारा कई नेताओं की महत्वाकांक्षा का परिणाम था। इस दौरान उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर के फैसलों का असर आज भी देश पर दिखता है। उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि अगर उस समय अलग तरीके से निर्णय लिए गए होते, तो आज भारत की स्थिति अलग हो सकती थी। इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंच तक नई बहस को जन्म दे दिया है।

‘आतंकवाद और ओवैसी’ पर टिप्पणी

अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर इतिहास में कुछ फैसले अलग होते, तो आज देश में आतंकवाद जैसी समस्याएं नहीं होतीं और कुछ खास तरह की राजनीति भी देखने को नहीं मिलती। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि आज जो लोग देश में विवादित बयान देते हैं, वे शायद उस स्थिति में मौजूद ही नहीं होते। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों का भी जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने देश के प्रति नकारात्मक बयान देने के लिए आलोचना की।

 ओवैसी का भी आया जवाब

दूसरी ओर असदुद्दीन ओवैसी ने भी हाल ही में एक जनसभा के दौरान देश के बंटवारे के मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बार-बार मुसलमानों को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। ओवैसी के अनुसार, उस समय बड़ी संख्या में मुसलमानों को वोट देने का अधिकार ही नहीं था, इसलिए पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के विभाजन में कई राजनीतिक ताकतों की भूमिका रही थी, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दोनों नेताओं के बयानों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है।

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