प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और जाने-माने विजुअल आर्टिस्ट व फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की कला प्रदर्शनी से जुड़ी एक बड़ी घटना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। नई दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र बीकानेर हाउस में आयोजित इस प्रदर्शनी में रेहान की खींची हुई लगभग 70 से अधिक तस्वीरें अचानक हटा दी गईं। आरोप है कि ये तस्वीरें हाल ही में देश भर में हुए विभिन्न युवा आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी हुई थीं, जिनके राजनीतिक रूप पर आपत्ति जताई गई थी। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने बेटे के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है और सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश साझा किया है।
विरोध-प्रदर्शनों की तस्वीरें हटाने पर मचा घमासान
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बीकानेर हाउस में लगी रेहान वाड्रा की आर्ट एग्जीबिशन से युवा आंदोलनों और प्रदर्शनों को दर्शाती करीब 70 तस्वीरों को आयोजकों के कहने पर हटा दिया गया। रेहान ने खुद यह आरोप लगाया कि प्रदर्शनी के आयोजकों ने इन तस्वीरों के राजनीतिक रंग और तेवर पर आपत्ति जताई थी और दबाव डालकर इन्हें हटवा दिया। कला जगत और सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि क्या कला की अभिव्यक्ति को इस तरह से दबाया जाना सही है। इस घटना के बाद से ही राजनीतिक गलियारों और कला प्रेमियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिससे यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
“जब कोई ताकतवर व्यक्ति डरने लगता है…”: प्रियंका का छलका दर्द
बेटे रेहान के साथ हुए इस वाकये पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखा और भावुक बयान जारी किया। उन्होंने रेहान को टैग करते हुए लिखा कि जब कोई शक्तिशाली इंसान किसी की स्वतंत्र अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह असल में अपनी उस ताकत को खो चुका होता है जिसे वह बचाए रखना चाहता है। प्रियंका ने अपने बेटे का हौसला बढ़ाते हुए यह भी कहा कि वह हमेशा सच के रास्ते पर अडिग रहे हैं और हर खूबसूरत चीज अपना रास्ता खुद उनके पास ढूंढ लेगी। अपने इस संदेश के आखिर में उन्होंने बेहद प्यार से ‘मामा’ लिखकर एक दिल का इमोजी भी जोड़ा, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस
इस पूरी घटना ने देश में एक बार फिर से कला, फोटोग्राफी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। जानकारों का मानना है कि एक कलाकार का काम समाज की वास्तविक तस्वीरों को बिना किसी डर के जनता के सामने रखना होता है, और ऐसे में राजनीतिक दबाव के चलते कृतियों को हटाना सेंसरशिप का रूप ले सकता है। हालांकि, आयोजकों और संबंधित पक्षों के अपने तर्क हो सकते हैं, लेकिन इस विवाद ने रेहान वाड्रा की इस प्रदर्शनी को अचानक से राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में कला के मंचों पर इस तरह के विषयों को लेकर क्या नए नियम या रुख देखने को मिलते हैं।
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