संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) द्वारा गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसकी कुख्यात ‘डी-कंपनी’ को ‘भारत-आधारित’ आपराधिक समूह बताए जाने के बाद भारत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस गंभीर गलती के लिए यूएन को जमकर फटकार लगाई है। नई दिल्ली ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि दाऊद इब्राहिम भारत में नहीं, बल्कि पाकिस्तान की धरती पर पनाह लिए हुए है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संस्थाओं को आतंकवाद और अंडरवर्ल्ड के मामलों पर तथ्यहीन और लापरवाह बयानबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई कमजोर होती है।
पाकिस्तान पर सीधा हमला, लादेन का दिया उदाहरण
भारतीय प्रतिनिधियों ने यूएन के इस दावों की धज्जियां उड़ाते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। भारत ने दुनिया को याद दिलाया कि दाऊद इब्राहिम उसी पड़ोसी देश में छिपा हुआ है, जिसकी सरजमीं पर कभी दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन छिपा था और अंततः अमेरिकी कार्रवाई में वहीं मारा गया था। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से यह बात स्पष्ट कर दी कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवादियों और अपराधियों का सुरक्षित अड्डा बना हुआ है, और दाऊद इब्राहिम का ठिकाना भी वहीं कराची या उसके आसपास के इलाकों में है। इसके बावजूद यूएन जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा डी-कंपनी को भारत-आधारित बताना तथ्यों से पूरी तरह परे और गैर-जिम्मेदाराना है।
क्या है पूरा विवाद और क्यों गलत है यूएन का दावा?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ या स्पेशल रैपोर्टियर की रिपोर्ट में डी-कंपनी को भारत से संचालित होने वाला एक आपराधिक सिंडिकेट करार दिया गया। इस रिपोर्ट के सामने आते ही भारतीय कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई और सरकार ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। सुरक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि दाऊद इब्राहिम दशकों से भारत छोड़कर भाग चुका है और उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का प्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है। भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह सबूत दिए जाते रहे हैं कि डी-कंपनी अपने अवैध धंधे और मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क पाकिस्तान की जमीन से ही संचालित करती है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का अडिग और कड़ा रुख
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फैलाए जा रहे झूठ के खिलाफ कितनी सख्ती से पेश आता है। भारत ने यूएन को यह चेतावनी भी दी है कि वैश्विक आतंकवाद और संगठित अपराध के मामलों में इस तरह की लापरवाही गंभीर परिणामों को जन्म दे सकती है। आतंकवाद के प्रायोजकों को बेनकाब करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस बात की ओर खींचा है कि असली गुनाहगारों को पनाह देने वाले देशों पर नकेल कसने की जरूरत है, न कि गलत रिपोर्टिंग के जरिए पीड़ित देश की छवि को धूमिल करने की।
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