मुंबई के वर्ली इलाके में भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित महिला जन आक्रोश रैली के दौरान माहौल अचानक गर्मा गया। रैली की वजह से इलाके में भारी ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक महिला ने गुस्से में प्रदर्शनकारियों और वहां मौजूद महाराष्ट्र सरकार के जल शक्ति मंत्री गिरीश महाजन से बहस शुरू कर दी। महिला का आरोप था कि राजनीतिक रैली के कारण आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है और उन्हें बेवजह घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ रहा है। यह बहस देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
महिला का गुस्सा, मंत्री को कहा ‘Get Out Of Here’
बहस के दौरान महिला का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उसने मंत्री गिरीश महाजन को ‘Get Out Of Here’ कह दिया। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, महिला लगातार ट्रैफिक जाम और रैली से हो रही परेशानी पर सवाल उठा रही थी। उसने कहा कि राजनीतिक प्रदर्शन के कारण आम नागरिकों की दिनचर्या प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यह पूरा वाकया कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। इस घटना ने मुंबई की सड़कों पर होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने किया समर्थन, सरकार पर उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने महिला का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि मुंबई की उस महिला को सलाम, जिसने मंत्री और प्रदर्शनकारियों को सड़क जाम करने के लिए करारा जवाब दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में रोजाना लोग घंटों ट्रैफिक में फंसते हैं, लेकिन इस परेशानी को लेकर सरकार गंभीर नहीं दिखती। उनके अनुसार, आम लोगों की असुविधा को नजरअंदाज कर राजनीतिक प्रदर्शन करना गलत है और इससे जनता का गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक है।
विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ी सियासी खींचतान
इस घटना के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस महिला के कदम को जनता की आवाज बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से इसे अनुशासनहीनता करार दिया जा रहा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया कि जब निर्धारित मैदान उपलब्ध हैं तो सड़कों पर रैली क्यों की जा रही है और व्यस्त समय में लोगों को क्यों परेशान किया जा रहा है। वहीं बीजेपी समर्थकों का कहना है कि प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया था। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक रैलियों और शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है।
