Karnataka News: कर्नाटक में महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित फंड घोटाले को लेकर सियासी घमासान बढ़ गया है। मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर BJP और जेडीएस ने विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए बीजेपी नेता सी.टी. रवि, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र समेत कई नेताओं और समर्थकों को एहतियातन हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों को फ्रीडम पार्क से विधान सौधा की ओर बढ़ने से रोक दिया गया।
नागेंद्र के इस्तीफे की मांग, विधानसभा घेरने पहुंचे BJP नेता
BJP पिछले करीब एक सप्ताह से वाल्मीकि निगम से जुड़े मामले को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने फ्रीडम पार्क से मार्च निकाला और विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। BJP नेताओं का आरोप है कि कथित 89 करोड़ रुपये के घोटाले में बी. नागेंद्र की भूमिका की जांच होनी चाहिए और उन्हें कैबिनेट से हटाया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने से पहले सी.टी. रवि ने आरोप लगाया कि नागेंद्र पर वाल्मीकि विकास निगम के फंड में गड़बड़ी से जुड़े गंभीर आरोप हैं। विपक्ष का कहना है कि जब तक सरकार इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
#WATCH | Bengaluru, Karnataka: Police detained BJP leaders and workers who were protesting and demanding the resignation of Karnataka Minister B. Nagendra over his alleged involvement in the Karnataka Dalit Valmiki Corporation scam. pic.twitter.com/5l4N8oVoDS
— ANI (@ANI) August 24, 2026
89 करोड़ से शुरू हुआ मामला, जांच में सामने आई बड़ी रकम
वाल्मीकि निगम का मामला साल 2024 में सामने आया था। उस समय निगम के अकाउंट सुपरिटेंडेंट पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उनके कथित सुसाइड नोट में निगम के पैसों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद हुई जांच में पता चला कि यूनियन बैंक में निगम के खाते से करीब 89 करोड़ रुपये कथित तौर पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए थे। आगे की जांच में कुल करीब 187 करोड़ रुपये के फंड में हेरफेर की बात भी सामने आई। मामले ने कर्नाटक की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया और विपक्ष ने सरकार पर लगातार दबाव बनाया।
2024 में नागेंद्र ने दिया था इस्तीफा
घोटाले को लेकर बढ़ते विवाद और जांच के बीच बी. नागेंद्र ने 6 जून 2024 को सिद्धारमैया सरकार में अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों तक भी पहुंची थी। इसके बाद करीब दो साल बाद 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कैबिनेट विस्तार के दौरान नागेंद्र को दोबारा सरकार में शामिल किया गया और उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई। BJP इसी वापसी को मुद्दा बनाकर सरकार पर निशाना साध रही है।
विपक्ष बोला- जब तक कार्रवाई नहीं, जारी रहेगा प्रदर्शन
विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित फंड घोटाले में नागेंद्र को जिम्मेदारी से बचाया जा रहा है। बीजेपी और जेडीएस का कहना है कि सरकार को पूरे मामले में जवाब देना चाहिए और संबंधित मंत्री को पद से हटाना चाहिए। वहीं पुलिस ने बिना अनुमति विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकते हुए कई नेताओं को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया। इस कार्रवाई के बाद कर्नाटक में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।
