उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आखिरकार अपनी नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची जारी कर दी है, जिसके बाद सूबे के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी की ओर से घोषित की गई इस नई सूची में कुल 30 स्थायी आमंत्रित सदस्य, 548 सामान्य सदस्य और 134 विशेष आमंत्रित सदस्यों के नाम शामिल किए गए हैं। इस बड़े संगठनात्मक फेरबदल के पीछे का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह मुस्तैद करना है। खास बात यह है कि आगामी 30 और 31 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद लखनऊ आ रहे हैं, जहां वे इस नवनियुक्त यूपी बीजेपी कार्यसमिति की एक अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शाह के दौरे से ठीक पहले आई इस सूची के कई गहरे सियासी मायने हैं, जो आने वाले दिनों में पार्टी की दिशा तय करेंगे।
दिग्गजों की वापसी और चौंकाने वाले नाम
इस नई कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने सियासी पंडितों को भी चौंका दिया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार को विशेष रूप से जगह मिली है। इनके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेताओं को भी स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। सूची में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, एमएलसी तारिक मंसूर, राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी, और कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों व वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जो यह दर्शाते हैं कि पार्टी ने संगठन में अनुभव और ऊर्जा के बीच एक बेहतरीन संतुलन साधने की कोशिश की है।
सपा से आए नेता को मिला स्थान और खास चेहरे
इस सूची का एक और सबसे बड़ा आकर्षण वह नाम है जिसने हाल ही में पाला बदला है। समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले सिनोद शाक्य को पार्टी ने तत्काल प्रभाव से प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाकर बड़ा तोहफा दिया है। इसके अलावा, विशेष आमंत्रित सदस्यों की लंबी सूची में कई चर्चित और बड़े चेहरे शामिल हैं। इनमें बेबी रानी मौर्य, सांसद रवि किशन, साक्षी महाराज, जगदंबिका पाल, सांसद संजय सेठ, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, नन्द गोपाल नन्दी, शशिकांत मणि त्रिपाठी, श्रीकांत शर्मा, सिद्धार्थनाथ सिंह, शलभमणि त्रिपाठी और केतकी सिंह जैसे नाम प्रमुख हैं। गौरव भाटिया, राधा मोहन दास अग्रवाल और अरुण सिंह को भी इस सूची में जगह देकर पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वह सोशल इंजीनियरिंग और जमीनी पकड़ दोनों को मजबूत करने पर पूरा जोर दे रही है।
संगठन की मजबूती और आगामी रणनीति का खाका
बीजेपी द्वारा जारी की गई यह सूची महज एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह आने वाले दिनों के सियासी समीकरणों की एक बड़ी पटकथा है। पार्टी ने इसमें ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अमरपाल मौर्य, अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष बासित अली, और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति जैसे प्रमुख नेताओं को भी शामिल किया है, जिससे हर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। ओम प्रकाश सिंह, रमापति राम त्रिपाठी, स्वतंत्र देव सिंह और भूपेंद्र सिंह चौधरी जैसे पूर्व प्रदेश अध्यक्षों का अनुभव भी इस कार्यसमिति को और अधिक धार देगा। अब सभी की निगाहें 30-31 अक्टूबर को होने वाली उस बड़ी बैठक पर टिकी हैं, जहां गृह मंत्री अमित शाह इन तमाम नेताओं के साथ मंथन करेंगे और यूपी में पार्टी की आगे की रणनीति का फाइनल खाका खींचेंगे।
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