झारखंड की राजधानी रांची में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी, पेपर लीक और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कई दिनों से धरने पर बैठे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार से जवाब चाहते हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच आंदोलन को लेकर पूरे राज्य की नजर रांची पर टिकी हुई है। कई सामाजिक संगठन और अलग-अलग लोग भी छात्रों के समर्थन में सामने आने लगे हैं, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिली है।
सरकार ने बातचीत का न्योता दिया, छात्रों ने रखी अपनी शर्त
बढ़ते आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने छात्रों से बातचीत की पहल की। रांची के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) धरना स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों से सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की तरफ से संदेश भेजा गया है और सरकार शाम 4 बजे प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करना चाहती है। इसके लिए छात्रों से पांच सदस्यों की टीम बनाने को कहा गया। लेकिन छात्रों ने बंद कमरे में बातचीत करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि अगर सरकार सच में उनकी बात सुनना चाहती है तो बातचीत खुले मंच पर और मीडिया की मौजूदगी में होनी चाहिए। छात्रों ने यह भी मांग की कि मुख्यमंत्री खुद धरना स्थल पर आएं और सीधे अभ्यर्थियों से बात करें। फिलहाल प्रशासन लगातार छात्रों को बातचीत के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।
आंदोलन को मिलने लगा राजनीतिक और सामाजिक समर्थन
छात्रों के आंदोलन को अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है। बुधवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में एनडीए के कई नेता आंदोलन स्थल पर पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों की समस्याएं सुनीं और उनके मुद्दों को सरकार के सामने उठाने की बात कही। वहीं, जाने-माने लेखक नीलोत्पल मृणाल भी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। उन्होंने युवाओं की चिंताओं को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। राजनीतिक दलों की बढ़ती सक्रियता के बाद माना जा रहा है कि यह आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीति का भी अहम मुद्दा बनता जा रहा है।
अब सबकी नजर सरकार और छात्रों की अगली रणनीति पर
फिलहाल रांची में हालात पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, जबकि छात्र अपनी मांगों से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकल सकता है। लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की उम्मीदें इस आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार क्या फैसला लेती है और छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पूरे झारखंड की नजर बनी हुई है।
