पश्चिम बंगाल की IPS अधिकारी डॉ. बुशरा बानो का एक वीडियो अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। मामला उनके वीडियो में इस्तेमाल किए गए धार्मिक शब्दों से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि वीडियो की शुरुआत बुशरा बानो ने ‘अस्सलामु अलैकुम’ से की और बातचीत के दौरान ‘इंशाअल्लाह’ कहा। वीडियो के अंत में उन्होंने ‘जजाकल्लाह’ शब्द का इस्तेमाल किया। इसके बाद उनके सार्वजनिक संवाद में धार्मिक अभिव्यक्तियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे। कुछ संगठनों ने इसे सरकारी अधिकारी के लिए उचित नहीं बताया है। उनका तर्क है कि संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को सार्वजनिक मंच पर धर्म से जुड़ी अभिव्यक्तियों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर अब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
हिंदू लीगल फंड ने गृह सचिव से की शिकायत
इस मामले में हिंदू लीगल फंड नाम के संगठन ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि बुशरा बानो ने अपने वीडियो में इस्लामिक और उर्दू अभिवादन का इस्तेमाल किया, जबकि ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय अभिवादन का इस्तेमाल नहीं किया। शिकायत में अधिकारी के सार्वजनिक संवाद को लेकर जांच की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि सरकारी अधिकारी राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनके सार्वजनिक बयानों में धार्मिक तटस्थता दिखाई देनी चाहिए। शिकायतकर्ता संगठन ने इस मामले को केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं मानते हुए सरकारी पद की गरिमा से जोड़कर देखा है। अब निगाह इस बात पर है कि शिकायत पर राज्य सरकार या गृह विभाग की ओर से कोई औपचारिक कार्रवाई या प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
महुआ मोइत्रा ने बीजेपी पर साधा निशाना
विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। महुआ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बुशरा बानो के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ बीजेपी सरकार खुद को धर्मनिरपेक्ष बताती है और BRICS सम्मेलन के दौरान प्रार्थना की सुविधा जैसी व्यवस्थाओं के जरिए अपनी सेक्युलर छवि पेश करती है, वहीं दूसरी ओर एक मुस्लिम महिला IPS अधिकारी को धार्मिक अभिवादन के इस्तेमाल को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। महुआ ने मीडिया के एक वर्ग पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उसके जरिए नफरत को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने अपने पोस्ट में बुशरा बानो के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वह उनके साथ खड़ी हैं। इस बयान के बाद मामला प्रशासनिक शिकायत से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल- क्या सरकारी अधिकारी के लिए धार्मिक अभिवादन गलत है?
बुशरा बानो से जुड़ा यह विवाद अब सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ शिकायत करने वाले संगठन का कहना है कि सरकारी पद पर रहते हुए अधिकारी को सार्वजनिक संवाद में धार्मिक रूप से तटस्थ भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। दूसरी तरफ महुआ मोइत्रा जैसे विपक्षी नेता इसे मुस्लिम अधिकारी को निशाना बनाए जाने से जोड़ रहे हैं। ऐसे में बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि क्या किसी सरकारी अधिकारी द्वारा अपनी सामान्य धार्मिक अभिव्यक्ति का इस्तेमाल सेवा नियमों या प्रशासनिक तटस्थता के खिलाफ माना जा सकता है। फिलहाल शिकायत के बाद किसी संभावित जांच या आधिकारिक कार्रवाई पर सबकी नजर है। आने वाले दिनों में गृह विभाग का रुख इस विवाद को आगे की दिशा दे सकता है।
Read More-BRICS के बाद ईरान को लेकर ट्रंप ने बदले तेवर, बोले- ‘डील करनी है तो…
