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कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए नया खतरा? धमकी भरे पत्र से मचा हड़कंप

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को ULC के नाम से फिर धमकी मिली है। ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने से रोकने की चेतावनी के बाद सुरक्षा और सरकारी आवास को लेकर चिंता बढ़ी।

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जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक बार फिर धमकी मिलने की खबर सामने आई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से जारी बताए जा रहे एक पत्र में कर्मचारियों को अलग ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा बताया जा रहा है। ताजा धमकी के बाद घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ट्रांजिट कॉलोनियों को लेकर क्या है विवाद?

रिपोर्टों के मुताबिक, धमकी में उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है, जो सुरक्षित आवास के लिए बनाई गई ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने की तैयारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में तैनात कर्मचारियों की लंबे समय से मांग है कि उन्हें सुरक्षित माहौल में रहने की सुविधा दी जाए। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी करना तभी संभव है, जब उनके और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। हाल के दिनों में सुरक्षित सरकारी आवास के जल्द आवंटन को लेकर उनकी मांग तेज हुई थी। इसी बीच सामने आई नई धमकी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

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कुछ हफ्तों में कई धमकी संदेश सामने आने का दावा

11 सितंबर की रिपोर्टों में बताया गया कि ULC के नाम से पिछले कुछ हफ्तों में कई धमकी भरे पत्र और संदेश सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में ताजा पत्र को करीब 40 दिनों के भीतर सामने आई छठी धमकी बताया गया है। इससे पहले भी कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने की चेतावनी दिए जाने और उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने के दावे सामने आ चुके हैं। हालांकि, इन पत्रों की वास्तविकता और इन्हें जारी करने वालों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि जांच का विषय है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि धमकियों के पीछे कौन लोग हैं और क्या इनका कोई वास्तविक आतंकी नेटवर्क से संबंध है।

1990 के दशक की घटनाओं से जुड़ी संवेदनशीलता

कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए घाटी में सुरक्षा का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। 1990 के दशक में आतंकवाद और हिंसा के कारण बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों को दोबारा मिल रही धमकियां पुराने डर को बढ़ा रही हैं। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित आवास के साथ कार्यस्थल तक आने-जाने और काम करने के दौरान भी पर्याप्त सुरक्षा मिले। नई धमकी के बाद प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह कर्मचारियों का भरोसा कायम करे और उन्हें बिना डर के नौकरी करने का माहौल उपलब्ध कराए।

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